सतीश दुबे, डबरा। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा नगर पालिका में संपत्तिकर (Property Tax) वसूली में 35 लाख 52 हजार रूपए से अधिक के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देश पर आरोपी संविदा कर्मचारी राघवेंद्र शर्मा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। डबरा सिटी थाना पुलिस ने नगर पालिका सीएमओ (CMO) साक्षी वाजपेयी के प्रतिवेदन पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पोर्टल पर बनाई फर्जी HOD की आईडी, ऐसे दिया घोटाले को अंजाम
नगर पालिका CMO साक्षी वाजपेयी द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार आरोपी संविदा कर्मी राघवेंद्र शर्मा ने ई-नगर पालिका 2.0 पोर्टल पर अनाधिकृत रूप से एक फर्जी HOD आईडी बनाई थी। इस आईडी का इस्तेमाल कर आरोपी ने बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी की स्वीकृति के संपत्तिकर की 372 ऑनलाइन रसीदें पोर्टल से डिलीट कर दी।
आंकड़ों में बड़ा खेल: पोर्टल पर 66 लाख, कैसबुक में सिर्फ 30 लाख
जांच में सामने आया कि 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच ई-नगर पालिका पोर्टल पर कुल 66,20,333 रूपए की वसूली दिखाई गई थी। जब नगर पालिका की मुख्य कैसबुक का मिलान किया गया तो उसमें मात्र 30,68,168 रूपए ही जमा पाए गए। इस तरह चालाकी से कुल 35,52,165 रूपए का गबन कर लिया गया।
हाईकोर्ट से लाया था स्टे, साक्ष्य के बाद दर्ज हुई FIR
घोटाला उजागर होने और बर्खास्तगी की कार्रवाई के बीच आरोपी राघवेंद्र शर्मा कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए माननीय हाईकोर्ट से स्टे ले आया था। हालांकि नगर पालिका अधिकारी साक्षी वाजपेयी ने हार नहीं मानी और कोर्ट के समक्ष घोटाले से जुड़े तकनीकी और वित्तीय साक्ष्य प्रस्तुत किए। सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने स्टे हटा दिया, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
डबरा सिटी थाना पुलिस ने सीएमओ की लिखित शिकायत को आधार बनाते हुए आरोपी राघवेंद्र शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और धारा 316(5) के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीकृत किया है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।
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बड़ा सवाल: एक साल तक सोते रहे जिम्मेदार अधिकारी?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि करीब एक साल तक पोर्टल और कैसबुक के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर चलता रहा लेकिन नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, अकाउंट विभाग और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी? क्या यह सिर्फ एक संविदा कर्मी का खेल था या इसमें कुछ अन्य बड़ी मछलियां भी शामिल हैं? यह पुलिस जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।

