अनुज कुमार पांडेय, गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज को पूर्वी चम्पारण के बेतिया से जोड़ने वाले गंडक नदी पर बने अति महत्वपूर्ण जादोपुर-मंगलपुर महासेतु पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पुल के स्पैन में लगातार बढ़ती दरारों और दो खंभों के बीच बढ़ते फासले ने जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को जहां केवल पाया संख्या-5 के पास ही दरार की बात सामने आई थी, वहीं अब पांच अलग-अलग स्थानों पर गंभीर दरारें उभर चुकी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन पुल से भारी वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
12 इंच का मिला गैप, बुलाए गए विशेषज्ञ
गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पाया संख्या 12 और 13 के बीच करीब 12 इंच का खतरनाक गैप देखा गया है। इसके अलावा पाया संख्या-5 भी आंशिक रूप से धंस गया है। डीएम ने कहा कि अगर ये दरारें और बढ़ती हैं, तो पुल की मरम्मत करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। पुल की तकनीकी जांच और तत्काल मरम्मत के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को बुलाया गया है।
विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद एक्शन
डीएम ने जानकारी दी कि भागलपुर के विक्रमशिला पुल हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के सभी प्रमुख पुलों की सुरक्षा जांच कराई जा रही है। इसी क्रम में जब इंजीनियरों ने मंगलपुर पुल की जांच की, तो यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई। रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए बड़े वाहनों की एंट्री बंद कर दी और पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगा दी है।
ठप हुआ व्यापार और आवागमन
यह महासेतु उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, सीवान, गोपालगंज समेत पड़ोसी देश नेपाल को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण लाइफलाइन मार्ग है। पुल पर रोक लगने से इस पूरे क्षेत्र का व्यापार और आम आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
550 करोड़ की लागत, 10 साल में ही जर्जर
करीब 550 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस महासेतु का उद्घाटन मार्च 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। लेकिन निर्माण के एक दशक के भीतर ही पुल के स्पैन में इस तरह की गंभीर क्षति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवादों से रहा है पुराना नाता
इस पुल का विवादों से पुराना नाता रहा है। दो वर्ष पूर्व भी तेज बारिश और गंडक नदी के भीषण कटाव के कारण इस महासेतु की एप्रोच सड़क धंस गई थी और उसमें बड़ी दरारें आ गई थीं। उस समय भारी विरोध के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में कटाव निरोधी कार्य कराकर स्थिति को संभाला था। अब एक बार फिर मुख्य पुल के ढांचे में ही दरारें आने से पुल के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है।
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