सुशील खरे, रतलाम। प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच रतलाम से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिला SP अमित कुमार के ऑफिस के बाहर उस समय हड़कंप मच गया, जब सूबे के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हिम्मत कोठारी खुद FIR दर्ज कराने के लिए जमीन पर धरने पर बैठ गए। पुलिस प्रशासन की इस अनदेखी ने अब राज्य की कानून व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार पूरा विवाद पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी के मित्र और 82 वर्षीय मीसाबंदी बसंत पुरोहित के प्लॉट पर हुए अवैध कब्जे से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि भू-माफियाओं द्वारा किए गए इस कब्जे की शिकायत लेकर वे लंबे समय से पुलिस के चक्कर काट रहे थे। दीनदयाल नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव को बार-बार आवेदन देने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो दो दिन पहले खुद पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी SP अमित कुमार से मिले। इसके बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

सुनवाई नहीं होने पर फूटा गुस्सा, दी आमरण अनशन की चेतावनी

अपनी ही सरकार और सिस्टम के आगे बुजुर्ग मीसाबंदी को लाचार देख पूर्व गृह मंत्री का गुस्सा फूट पड़ा। परेशान होकर वे सीधे रतलाम एसपी कार्यालय पहुंचे और चैंबर के बाहर जमीन पर ही धरने पर बैठ गए। वरिष्ठ भाजपा नेता के जमीन पर बैठते ही वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। इस दौरान कोठारी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे यहीं पर आमरण अनशन शुरू कर देंगे।

पूर्व गृह मंत्री के धरने के बाद जागा पुलिस प्रशासन

हिम्मत कोठारी के कड़े तेवर को देखते हुए एसपी अमित कुमार ने आनन-फानन में मामले को संज्ञान में लिया और मातहत अधिकारियों को तत्काल आदेश जारी किया। एसपी के निर्देश के बाद पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आधे घंटे के भीतर इस मामले में FIR दर्ज कर ली जाएगी।

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सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

इस घटना ने मध्य प्रदेश के प्रशासनिक सुशासन पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न लगा दिया है। गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि जब राज्य के पूर्व गृह मंत्री और सत्ताधारी दल के इतने वरिष्ठ नेता को अपने अधिकारों और एक बुजुर्ग मीसाबंदी को न्याय दिलाने के लिए एसपी दफ्तर के बाहर जमीन पर बैठना पड़ रहा है तो फिर उस जिले में आम नागरिकों के क्या हालात होंगे और उनकी शिकायतों पर पुलिस कितनी गंभीरता से काम करती होगी।

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