विशेष गहन पुनरीक्षण में में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार सवाल खड़ा किये. यहां तक कि जस्टिस भुइयां और जस्टिस नरीमन ने भी इसको लेकर सवाल उठाए. अब इस कड़ी में एक और नया नाम पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ का भी जुड़ गया है जिन्होंने इस पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा है कि यदि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी ईमानदारी पर भरोसा न किया जाए, तो यह लोकतंत्र की जड़ में ज़हर घोलने जैसा होगा.

भारत के चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चिंता जताई है, और उसकी स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता जताई है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भारत के चुनाव आयोग की आजादी की रक्षा के लिए मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग की. उन्होंने कहा कि ये वो समय है, जब देश को हमारी लोकतंत्र की रक्षा के बारे में सोचना चाहिए और कदम उठाने चाहिए.

पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के नियमों के अंतर को एक जैसी करने की मांग की. इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स, केरलम द्वारा एक सेमिनार को संबोधित करते हुए ये सब बातें कहीं. जस्टिस जोसेफ ने ये मांग भी की कि सभी चुनाव आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया वही होनी चाहिए, जो सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए है.

जस्टिस जोसेफ अपने संबोधन में संविधान सभा की बहसों के दौरान चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर जताई गई चिंताओं का जिक्र भी किया. जस्टिस जोसेफ ने अपने संबोधन में संविधान सभा के सदस्य सिब्बन लाल सक्सेना के उस प्रस्ताव का भी ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग में नियुक्तियों को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में दो-तिहाई बहुमत से मंज़ूरी मिलनी चाहिए.

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