हेमंत शर्मा, इंदौर। धार की बहुचर्चित भोजशाला मामले में आखिरकार चार साल लंबी कानूनी जंग के बाद इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। मंगलवार को हुई अहम सुनवाई में सभी पक्षों ने अपनी-अपनी अंतिम दलीलें कोर्ट के सामने रखीं, जिसके बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब पूरे देश की निगाहें अदालत के आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।

11 मई 2022 से शुरू हुई थी सुनवाई

मध्य प्रदेश के भोजशाला विवाद को लेकर वर्ष 2022 में दायर याचिका पर लगातार सुनवाई चल रही थी। करीब चार साल तक चले इस मामले में हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष दोनों ने ऐतिहासिक दस्तावेज, पुरातात्विक तथ्य और धार्मिक अधिकारों से जुड़े कई तर्क कोर्ट के सामने रखे।

कोर्ट में दिग्गज वकीलों की लंबी बहस

मंगलवार को हुई सुनवाई में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन समेत कई वकील जुड़े रहे, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से भी कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं। इसके अलावा केंद्र सरकार, एएसआई और राज्य शासन की ओर से भी पक्ष रखा गया।

री-जॉइंडर बहस भी हुई पूरी

सुनवाई के दौरान री-जॉइंडर यानी जवाबी दलीलों का दौर भी पूरा हुआ। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक वरिष्ठ अधिवक्ता ए.के. चितले, एएसआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता सैयद अशहर अली वारसी और अन्य वकीलों ने अपनी अंतिम बहस पूरी की। इसके बाद कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा- “Heard finally. Reserved for orders.” यानी सुनवाई पूरी हो चुकी है और आदेश सुरक्षित रखा गया है।

देशभर में चर्चाओं का केंद्र बना भोजशाला विवाद

धार भोजशाला मामला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है। एएसआई सर्वे और ऐतिहासिक दावों को लेकर भी लगातार बहस होती रही है। अब हाईकोर्ट का फैसला इस विवाद की दिशा तय कर सकता है। फैसला सुरक्षित होने के बाद अब सभी पक्षों को हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार है। माना जा रहा है कि अदालत का निर्णय आने वाले समय में इस बहुचर्चित विवाद पर बड़ा असर डाल सकता है।

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