संजीव, सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत से एक बेहद जरूरी और जनहित से जुड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों की जान बचाने के लिए एक नई और कल्याणकारी योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत किसी भी सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को समय पर डॉक्टरी सहायता देने के लिए तत्काल डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज (बिना पैसे दिए इलाज) मुहैया कराया जाएगा। सोनीपत के एसडीएम और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अधिकारी सुभाष चंद्र ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य हादसे के बाद के पहले एक घंटे यानी गोल्डन ऑवर के दौरान घायल को सही और बेहतर इलाज देना है, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से सड़क हादसों में होने वाली लगभग 50 फीसदी मौतों को रोका जा सकता है।

केंद्रीय अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की समीक्षा बैठक
इस नई व्यवस्था को जमीन पर लागू करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने एक अहम समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि यह नियम राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे), राज्य मार्ग (स्टेट हाईवे) या फिर शहर की किसी भी सड़क पर हुए हादसे पर लागू होगा। दुर्घटना का शिकार हुए किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने के पहले सात दिनों के लिए अधिकतम 1 लाख 50 हजार रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाएगा।
लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर होगी सख्त कार्रवाई
एसडीएम सुभाष चंद्र ने साफ किया कि इस योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मिलेगा जो आयुष्मान भारत योजना यानी पीएमजेएवाई के तहत रजिस्टर्ड (सूचीबद्ध) हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी रजिस्टर्ड अस्पतालों के साथ बैठक करें और उन्हें सख्त हिदायत दें कि जैसे ही कोई सड़क दुर्घटना का मरीज आए, उसका इलाज तुरंत शुरू किया जाए। अगर किसी भी अस्पताल ने इलाज में थोड़ी भी ढिलाई या लापरवाही दिखाई, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस को ई-डीएआर पोर्टल पर तुरंत करना होगा रजिस्ट्रेशन
हादसे के शिकार लोगों को बिना किसी देरी के इस योजना का लाभ मिल सके, इसके लिए पुलिस विभाग को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसडीएम ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़क हादसे की सूचना मिलते ही वे पीड़ित व्यक्ति की पूरी जानकारी सड़क परिवहन मंत्रालय के ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) पोर्टल और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम पर तुरंत अपलोड करें। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और डिजिटल है, जिससे अस्पताल के खर्चों का भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड (एमवीएएफ) के जरिए सीधे अस्पताल को कर दिया जाएगा। इस योजना को डायल-112 हेल्पलाइन नंबर से भी जोड़ा गया है, जिससे पीड़ित या मदद करने वाला कोई भी राहगीर (गुड सेमेरिटन) तुरंत एंबुलेंस बुला सकता है। इस बैठक में एसीपी जसपाल सिंह और डिप्टी सीएमओ गिन्नी लांबा समेत कई विभागों के बड़े अधिकारी मौजूद रहे।

