Lifestyle Desk – प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से खाने की क्रेविंग्स बढ़ जाती हैं. कभी कुछ मीठा खाने का मन करता है तो कभी मसालेदार या तला-भुना भोजन आकर्षित करने लगता है. हालांकि, इस दौरान क्रेविंग्स होना सामान्य बात है, लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए बार-बार जंक फूड खाना मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को अतिरिक्त पोषण, विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन की जरूरत होती है. ऐसे में यदि महिला बार-बार पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक या अन्य प्रोसेस्ड फूड का सेवन करती है, तो शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इससे मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं इससे किस तरह के नुकसान होते हैं.
बढ़ सकता है अत्यधिक वजन
जंक फूड में कैलोरी, चीनी और अनहेल्दी फैट की मात्रा अधिक होती है. इसका अधिक सेवन करने से गर्भवती महिलाओं का वजन तेजी से बढ़ सकता है. जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ने पर गर्भावधि मधुमेह (गेस्टेशनल डायबिटीज), हाई ब्लड प्रेशर और प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है.
पोषण की कमी का खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि जंक फूड पेट तो भर देता है, लेकिन इसमें आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है. यदि महिला नियमित रूप से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करती है, तो आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और प्रोटीन जैसे जरूरी तत्वों की कमी हो सकती है. इससे मां को कमजोरी, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
बच्चे के विकास पर पड़ सकता है असर
प्रेग्नेंसी के दौरान मां का खानपान सीधे बच्चे के विकास से जुड़ा होता है. असंतुलित और जंक फूड आधारित डाइट गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है. कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन बच्चे में आगे चलकर मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है.
पाचन संबंधी परेशानियां
तला-भुना और मसालेदार भोजन अधिक मात्रा में खाने से एसिडिटी, गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. प्रेग्नेंसी में पहले से ही पाचन तंत्र थोड़ा संवेदनशील हो जाता है, इसलिए जंक फूड इन परेशानियों को और बढ़ा सकता है.
कैसे करें क्रेविंग्स को कंट्रोल?
क्रेविंग्स को पूरी तरह दबाने की जरूरत नहीं है, लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है. यदि कुछ खाने का मन हो तो उसकी हेल्दी वैरायटी चुनें.
- चिप्स की जगह भुने हुए मखाने, मीठे की जगह फल या घर पर बने हेल्दी स्नैक्स का सेवन किया जा सकता है.
- साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना, छोटे-छोटे अंतराल पर पौष्टिक भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना भी क्रेविंग्स को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है.
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लें. स्वस्थ और संतुलित आहार न केवल मां को फिट रखता है, बल्कि बच्चे के बेहतर विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

