रायपुर। धान का कटोरा छत्तीसगढ़ के किसानों की खुशहाली राज्य की समृद्धि का मूल आधार है। खरीफ सीजन में उर्वरकों, विशेष रूप से डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की उपलब्धता सुनिश्चित करना आज की परिस्थिति में किसी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और बढ़ती मांग के इस दौर में यह चुनौती और भी जटिल हो जाती है। राज्य के मुखिया विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने इस चुनौती को अवसर के रूप में बदलते हुए किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर एक प्रभावी और दूरदर्शी रणनीति अपनाई है। मिलने वाली यह बड़ी प्रशासनिक सफलता, एक संवेदनशील नेतृत्व, मजबूत समन्वय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है।
केंद्र-राज्य समन्वय बन रहा समाधान की पहली सीढ़ी
डीएपी की समस्या का समाधान केवल राज्य स्तर पर संभव नहीं है। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ प्रभावी संवाद और समन्वय की भी आवश्यकता थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसी सोच के तहत केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक का वांछित परिणाम मिला और छत्तीसगढ़ को खरीफ सीजन के लिए 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी का आवंटन हुआ। सामान्य से अधिक इस आवंटन से राज्य में खाद की संभावित कमी को समय रहते समाप्त कर दिया गया है। CM साय का यह कदम दर्शाता है कि वे समस्याओं को पहचान कर उनके समाधान के लिए प्रभावी पहल करने वाले कुशल मुख्यमंत्री हैं।
भंडारण और पूर्व तैयारी ने दिया संकट से पहले समाधान

समय से पूर्व तैयारी कर लेना साय सरकार की एक बड़ी खासियत रही है। कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 30 जून तक लगभग 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया जा चुका था। यह नई शुरुआत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अनुभव में आया है कि खाद की कमी अचानक नहीं होती बल्कि योजना की खामियों से यह अभाव उत्पन्न होता है। लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ की सरकार ने पहले ही पर्याप्त भंडारण कर लिया है, जिससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जा सके। इस कदम से किसानों की चिंता बहुत हद तक कम हुई है और कृषि कार्य भी बिना बाधा के आगे बढ़ रहा है।
उर्वरक के विकल्पों से मिली आधुनिक सोच की झलक

वैश्विक स्तर पर डीएपी की कमी को नजर में रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने एक विकल्प पर निर्भर रहने की बजाय वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने की नीति अपनाई। छत्तीसगढ़ में नैनो डीएपी, नैनो यूरिया, एनपीके और एसएसपी जैसे उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। इससे किसानों को नया विकल्प मिला, उनकी कृषि लागत कम हुई और उत्पादन क्षमता में भी सुधार हुआ। छत्तीसगढ़ की साय सरकार परंपरागत सोच से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहती है।

कालाबाजारी पर सख्ती से मिल रहा पारदर्शिता और न्याय का संदेश
खाद संकट के समय जमाखोरी और कालाबाजारी सबसे बड़ी समस्या होती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन, मार्कफेड और कृषि विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस प्रशासनिक सख्ती के परिणामस्वरूप छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शिता के साथ खाद उपलब्ध हुआ। यह कदम किसानों के विश्वास को मजबूत करने में काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ।
संभावित अल्प वर्षा के लिए तैयारी: दूरदर्शी नेतृत्व

खरीफ सीजन-2026 में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री साय ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में खाद, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, बीज उपलब्धता और वैज्ञानिक खेती जैसे सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिलेवार स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि किसी भी स्थिति में किसानों को नुकसान का सामना न करना पड़े।

जल संरक्षण और ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान
मुख्यमंत्री ने जल संकट को गंभीरता से लेते हुए ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए। इस अभियान के तहत वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं का निर्माण और भूजल संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वैज्ञानिक खेती और तकनीकी मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री साय ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक बनाएं। इन तकनीकों में शामिल हैं डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण। इसके साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। उम्मीद है इससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि जोखिम कम करने में सहयोग मिलेगा।
तकनीक की मदद से किसानों तक पहुँचेगी समय पर जानकारी
किसानों को मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने ‘सचेत’, ‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ जैसे मोबाइल ऐप्स के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। इन ऐप्स के जरिए किसान समय रहते निर्णय लेने में समर्थ होंगे और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति को कम कर सकते हैं।
वीबी-जी राम जी योजना साबित हो रही ग्रामीण समृद्धि की दिशा में मजबूत कदम
1 जुलाई 2026 से लागू वीबी-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है। इस योजना के जरिए प्राकृतिक संसाधनों और जल संरक्षण के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। यह योजना रोजगार बढ़ाती है। कृषि और जल सुरक्षा को भी मजबूत बना रही है।
किसानों के प्रति प्रतिबद्धता ही है मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसानों का हित सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज या कृषि संबंधित अन्य संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके कार्यों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की यह पूरी प्रक्रिया एक प्रशासनिक उपलब्धि होने के साथ ही साथ एक सशक्त और संवेदनशील नेतृत्व का प्रमाण भी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ खाद संकट से उबरते हुए कृषि के क्षेत्र में एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहाँ किसान आत्मनिर्भर, समृद्ध और सुरक्षित हैं।
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