नई दिल्ली। दिल्ली में हर साल आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें होटल, फैक्ट्री, बाजार और रिहायशी इमारतें शामिल होती हैं। हाल ही में मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। पिछले करीब 30 वर्षों में दिल्ली ने कुछ ऐसे भीषण अग्निकांड देखे हैं, जिन्होंने पूरे देश को हिला दिया था।
उपहार सिनेमा अग्निकांड (1997): आग ने निगल ली 59 लोगों की जान गई
13 जून 1997 का दिन दिल्ली के इतिहास में एक भयावह अग्निकांड के रूप में दर्ज है, जब साउथ दिल्ली के सीआर पार्क स्थित उपहार सिनेमा में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हुआ था। जानकारी के अनुसार, उस दिन सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर’ का शो चल रहा था, जब एक बिजली ट्रांसफार्मर से निकली चिंगारी के कारण सिनेमा हॉल की निचली मंजिल में आग लग गई। धीरे-धीरे आग और धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जिससे अंदर मौजूद लोग फंस गए। इस दर्दनाक हादसे में 59 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। अधिकांश मौतें आग से नहीं बल्कि धुएं और जहरीली गैसों से दम घुटने के कारण हुई थीं। हादसे के बाद यह भी सामने आया था कि इमारत में निकास व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे, जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। इस घटना ने देशभर में सिनेमा हॉल और सार्वजनिक भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। उपहार अग्निकांड आज भी भारत के सबसे दर्दनाक शहरी हादसों में से एक माना जाता है।
अनाज मंडी फैक्ट्री हादसा में जल गए थे 43 लोग
राजधानी का दूसरा सबसे बड़ा अग्निकांड अनाज मंडी फैक्ट्री हादसा (2019) रहा। साल 2019 में रानी झांसी रोड स्थित एक अवैध फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने बड़ा कहर बरपाया था। इस हादसे में कुल 43 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह हादसा उस समय हुआ जब कई मजदूर फैक्ट्री के अंदर मौजूद थे और आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। संकरी गलियां, एक ही निकास मार्ग और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण लोग समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। घटना के बाद यह सामने आया कि इमारत में अग्नि सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया था। इस हादसे ने दिल्ली में अवैध औद्योगिक इकाइयों और बिल्डिंग सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर बड़ा सवाल खड़ा किया।
मालवीय नगर होटल हादसा
मालवीय नगर स्थित मैक्स अस्पताल के पास लेमन ग्रीन होटल में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब होटल के निचले फ्लोर में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना के अनुसार, उस समय होटल में इलाज के लिए आए कई परिवार ठहरे हुए थे। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। इस भीषण हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई। यह घटना पिछले 29–30 वर्षों में हुई सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक मानी जा रही है, जिसने कई परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
विवेक विहार AC ब्लास्ट
विवेक विहार इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। एक घर में एयर कंडीशनर (AC) में हुए धमाके के बाद चार मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई। जानकारी के अनुसार, आग लगने की घटना इतनी तेजी से फैली कि पूरी इमारत उसकी चपेट में आ गई। हादसे में जैन परिवार के 9 लोगों की झुलसकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। आग पर काबू पाने के लिए कई घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी।
मुंडका फैक्ट्री अग्निकांड
13 मई 2022 पश्चिमी दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास एक कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग लगने की घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इमारत में तेजी से फैली और कुछ ही समय में पूरी बिल्डिंग इसकी चपेट में आ गई। इमारत में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। इस दर्दनाक हादसे में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे के बाद कई परिवार बेघर हो गए और उनका सामान व दस्तावेज पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
1 जून 2026 को आईटीओ स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) परिसर में शिक्षा मंत्रालय के कार्यालय की दूसरी मंजिल पर आग लग गई। हालांकि इस घटना में बड़े पैमाने पर जनहानि की सूचना नहीं मिली, लेकिन कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई।
इसके एक दिन पहले 31 मई 2026 को मुखर्जी नगर इलाके की एक चार मंजिला इमारत में आग लगने की घटना सामने आई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
3 मई 2026 को विवेक विहार इलाके में भीषण आग लगी थी, जिसमें जैन परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह 18 मार्च 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से तीन बच्चों समेत कम से कम नौ लोगों की जान चली गई थी।
पिछले वर्ष जून 2025 में द्वारका सेक्टर-13 स्थित शपथ सोसाइटी की बहुमंजिला इमारत में आग लगने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। आग से बचने के प्रयास में सातवीं मंजिल से कूदने के दौरान 10 वर्षीय लड़के, एक लड़की और उनके पिता की मौत हो गई थी।
राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में आग से संबंधित 7,800 से अधिक आपातकालीन घटनाएं दर्ज की गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, यह औसतन हर महीने करीब 1,950 घटनाएं और प्रतिदिन लगभग 65 मामले बनते हैं। वहीं, प्रति घंटे लगभग 3 आग से जुड़े मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। विशेष रूप से अप्रैल 2026 में स्थिति और अधिक चिंताजनक रही, जब अकेले एक महीने में 2,300 से अधिक आग की घटनाएं दर्ज की गईं। यह कुल मामलों का लगभग 30 % हिस्सा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2025 के दौरान जहां 6,511 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2026 की इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 7,800 से अधिक हो गई। इस तरह इस वर्ष लगभग 1,290 अधिक घटनाएं सामने आई हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के अनुसार, बढ़ते मामलों के बीच आपातकालीन कॉल्स का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।29 मई 2026 को विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके मलिक ने कहा था कि आग से संबंधित कॉल प्रतिदिन 250 तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बयान से तीन दिन पहले ही विभाग को एक ही दिन में 256 कॉल प्राप्त हुई थीं, जो अब तक के उच्च स्तरों में से एक है।
पिछले डेढ़ दशक में जहां आपातकालीन कॉल्स लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रही हैं, वहीं कई वर्षों में मौतों के आंकड़ों में भी चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2009-10 में 21,314 कॉल्स के साथ 423 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2010-11 में 22,187 कॉल्स और 447 मौतें दर्ज की गईं। 2011-12 में 18,143 कॉल्स और 357 मौतें, जबकि 2012-13 में 22,581 कॉल्स के साथ 285 मौतें दर्ज हुईं।
मध्य दशक के वर्षों में भी यह सिलसिला जारी रहा। 2014-15 में 23,242 कॉल्स और 291 मौतें, 2015-16 में 27,089 कॉल्स और 339 मौतें, तथा 2016-17 में 30,285 कॉल्स के साथ 277 मौतें दर्ज की गईं। 2017-18 में 29,423 कॉल्स और 318 मौतें हुईं। इसके बाद के वर्षों में भी आंकड़े ऊंचे बने रहे। 2018-19 में 31,264 कॉल्स और 297 मौतें, 2019-20 में 31,157 कॉल्स और 308 मौतें, तथा 2020-21 में 25,709 कॉल्स और 346 मौतें दर्ज की गईं। हाल के वर्षों में स्थिति और गंभीर होती दिखाई देती है। 2021-22 में 27,343 कॉल्स के साथ 591 मौतें, जबकि 2022-23 में 31,958 कॉल्स और 1,029 मौतें दर्ज हुईं। सबसे चिंताजनक आंकड़ों में 2023-24 में 31,575 कॉल्स के दौरान 3,232 लोग घायल हुए और 1,303 लोगों की मौत दर्ज की गई।
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