Lalluram Desk. गणेशोत्सव के पावन पर्व का आगाज हो चुका है और देशभर में विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। घर-घर और पंडालों में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारें गूंज रहे हैं। गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल निकल चुका है, लेकिन यदि किसी कारणवश आप दोपहर के मुख्य मुहूर्त में स्थापना नहीं कर पाए हैं, तो शाम के शुभ चौघड़िया मुहूर्त में भी बप्पा को विधि-विधान से विराजित किया जा सकता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दोपहर के बाद ‘लाभ’ और ‘अमृत’ चौघड़िया में गणेशजी की मूर्ति स्थापित करना शुभ माना गया है।

गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

लाभ चौघड़िया: दोपहर 3:22 बजे से शाम 4:55 बजे तक
अमृत चौघड़िया: शाम 4:55 बजे से शाम 6:28 बजे तक

ये सामग्रियां पूजन से पहले तैयार रखें

पूजा में किसी प्रकार का विघ्न न आए, इसके लिए सामग्री पहले से जुटा लेंl जिसमे चौकी, लाल या पीला नया कपड़ा, अक्षत और श्री गणेश की प्रतिमा।
तांबे का कलश, शुद्ध जल, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, मौली, रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, धूप, दीप, कपूर और अगरबत्ती।

विशेष भोग व अर्पण: दूर्वा, लाल पुष्प (गुड़हल), पंचामृत, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, दक्षिणा और बप्पा के प्रिय मोदक या बेसन के लड्डू।

इन नियमों का ध्यान स्थापना के दौरान रखें

दिशा और स्थान: पूजा स्थल को पूरी तरह स्वच्छ करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर थोड़े अक्षत रखें और फिर प्रतिम स्थापित करें। मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिश की ओर होना शुभ माना जाता है। भगवान गणेश की प्रतिमा को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें।

पूजन विधि: सबसे पहले प्रथम पूज्य का आह्वान करें। इसके बाद जल व पंचामृत से आचमन कराकर रोली, चंदन और कुम-कुम का तिलक लगाएं।

दूर्वा और प्रिय भोग: गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठ और लाल फूल श्रद्धा के साथ अर्पित करें। इसके बाद मोदक या लड्डू का नैवेद्य लगाएं।

मंत्र और आरती: धूप-दीप प्रज्वलित कर ओम गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। अंत में परिजनों के साथ गणेशजी की आरती कर सुख-समृद्धि की कामना करें।

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