गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले में इन दिनों इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष चिंता का कारण बन गया है। जंगली हाथियों के बाद अब बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। जिले के रंका, भंडरिया, चिनिया, बरगढ़ और रमकंडा के जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं।

वन विभाग ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है और ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विभाग ने लोगों से शाम और अहले सुबह जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की है।

रंका में बाघ ने बकरियों और बछड़े को बनाया शिकार

रंका के ढेगुरा जंगल में बाघ द्वारा तीन बकरियों और एक बछड़े को मारे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले भंडरिया क्षेत्र में भी पशुओं के शिकार की सूचना मिली थी।

जंगल में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि मिले पदचिह्न सामान्य जंगली जानवरों के निशान से अलग हैं।

जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी एबीन बेनी अब्राहम के मुताबिक भंडरिया और बलीगढ़ क्षेत्र से भी बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली है।

पगमार्क की पुष्टि के बाद वन विभाग अलर्ट

ग्रामीणों से मिली सूचनाओं के आधार पर वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के इलाकों में सर्च एवं निगरानी अभियान चला रही है। डीएफओ ने बताया कि मौके पर मिले पगमार्क बाघ के ही हैं।

वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और विशेष रूप से सुबह-शाम सतर्क रहने की सलाह दी है।

हाथियों के हमले में 4 दिन में दो मौतें

बाघ की दस्तक के बीच जंगली हाथियों का आतंक भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले चार दिनों में रंका और चिनिया इलाके में हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है।

बताया गया कि हाथियों ने दोनों लोगों को पैरों तले कुचल दिया। घटनाओं के बाद ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिला और लोगों ने सड़क जाम कर विरोध भी जताया।

ग्रामीणों का सवाल है कि लगातार बढ़ रहे वन्यजीवों के हमलों से आखिर उन्हें कब तक खतरा झेलना पड़ेगा। वन विभाग के अनुसार दोनों घटनाओं की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है।

इंसान और वन्यजीव संघर्ष रोकना बड़ी चुनौती

वन विभाग का कहना है कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है और बाघ व हाथी दोनों पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में विभाग का जोर ग्रामीणों को जागरूक करने, निगरानी बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर है।

फिलहाल बाघ की गतिविधियों पर वन विभाग की टीम नजर बनाए हुए है। वहीं, हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए भी ग्रामीणों को लगातार सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।