Dharm Desk- Garuda Puran : मृत्यु जीवन का अटल सत्य है. जिसे कोई टाल नहीं सकता, लेकिन जब कोई अपना इस संसार को छोड़कर चला जाता है, तो पीछे छूट जाती हैं उसकी यादें और उससे जुड़ी वस्तुएं. कई लोग इन चीजों को सहेजकर रखते हैं, जबकि कुछ परंपराएं और धार्मिक ग्रंथ इस विषय में स्पष्ट दिशा देते है. विशेष रूप से गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृतक की किन वस्तुओं को घर में रखना उचित है और किनका त्याग या दान करना ही बेहतर होता है.

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा कुछ समय तक अपने घर, परिवार और उपयोग की वस्तुओं के प्रति आकर्षित रहती है. यही कारण है कि यदि उसके सामान का अत्यधिक उपयोग किया जाए तो आत्मा का मोह समाप्त होने में विलंब हो सकता है. आत्मा को आगे की यात्रा के लिए संसारिक बंधनों से मुक्त होना जरूरी माना गया है, इसलिए इस दौरान संतुलन और संयम आवश्यक है.
मृतक के आभूषण को क्या करें
जहां तक गहनों का सवाल है, धार्मिक मान्यता यह कहती है कि मृतक के आभूषणों को घर में सुरक्षित रखा जा सकता है. लेकिन उन्हें पहनने से बचना चाहिए. गहनों से व्यक्ति का भावनात्मक जुड़ाव गहरा होता है. जिससे आत्मा का मोह बढ़ सकता है. इसलिए इन्हें स्मृति के रूप में रखना तो ठीक है, लेकिन उपयोग करना उचित नहीं माना जाता.
कपड़ों को लेकर गरुड़ पुराण में विशेष महत्व
मृत व्यक्ति के वस्त्रों को जरूरतमंदों में दान करना सबसे शुभ माना है. ऐसा करने से न केवल मृत आत्मा को शांति मिलती है. बल्कि यह एक पुण्य कार्य भी होता है. यह त्याग आत्मा के मोह को कम करने में सहायक होता है.
रोजमर्रा की चीजों का क्या करना चाहिए
जैसे चश्मा, घड़ी, बिस्तर या अन्य निजी वस्तुएं घर में रखी जा सकती है. लेकिन उनका नियमित उपयोग करने से बचना चाहिए. समय के साथ इन वस्तुओं का दान करना या उन्हें अलग कर देना ही बेहतर माना जाता है, ताकि घर का वातावरण सकारात्मक बना रहे.
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