गौरव जैन, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले से पर्यावरण और प्रशासन को झकझोर देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। मरवाही वनमंडल के जंगलों में लकड़ी तस्करों ने बड़े पैमाने पर अवैध कटाई कर वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। तस्करों ने इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीनों का इस्तेमाल कर सागौन और साल जैसे बेशकीमती पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया।

पीपरखूटी बीट बना तस्करों का निशाना

जानकारी के अनुसार पूरा मामला गौरेला वन परिक्षेत्र के पीपरखूटी बीट का है। यहां बीते 2-3 महीनों से लगातार अवैध कटाई का खेल चल रहा था। तस्करों ने सुनियोजित तरीके से जंगल के भीतर प्रवेश कर कीमती पेड़ों को काटा और उन्हें बाहर निकाल दिया। प्रारंभिक जांच में जंगल के भीतर 122 पेड़ों के ठूंठ मिलने से विभाग में हड़कंप मच गया है। आशंका जताई जा रही है कि यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है।

ग्रामीणों ने दी थी सूचना, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस अवैध कटाई की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को करीब दो महीने पहले ही दे दी थी। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो इतने बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई रोकी जा सकती थी। विभाग की निष्क्रियता के चलते तस्कर बेखौफ होकर अपना काम करते रहे।

रायपुर से पहुंची फ्लाइंग स्क्वाड, खुली पोल

मामले की गंभीरता तब सामने आई जब इसकी सूचना रायपुर तक पहुंची। इसके बाद राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वाड की टीम को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। टीम ने जब जंगल का निरीक्षण किया, तो बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ों के अवशेष मिले। 122 ठूंठों की पुष्टि के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

विभागीय लापरवाही या मिलीभगत?

सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। मरवाही वनमंडल मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर और बिलासपुर-जबलपुर मुख्य मार्ग से सटे क्षेत्र में महीनों तक इतनी बड़ी अवैध कटाई होना और जिम्मेदार डीएफओ, रेंजर और बीट गार्ड को इसकी जानकारी तक न होना, कई गंभीर संदेह पैदा करता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी घटना बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। अब यह जरूरी हो गया है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोगों का आरोप है कि यदि निगरानी व्यवस्था मजबूत होती और समय पर कार्रवाई की जाती, तो जंगल को इस तरह नुकसान नहीं होता।

जांच जारी, सख्त कार्रवाई की उम्मीद

फिलहाल रायपुर की फ्लाइंग स्क्वाड टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है। यदि जांच निष्पक्ष रूप से की जाती है, तो इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे हो सकते हैं और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है।

जंगलों की इस तरह हो रही बर्बादी न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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