गयाजी के वजीरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत सकरदास नवादा पंचायत से 11वीं और 10वीं की चार छात्राओं के अचानक तीन दिनों से लापता होने का मामला सामने आया है। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और परिजनों में गहरी चिंता का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि बच्चियों को एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने छात्रवृत्ति का बोनाफाइड फॉर्म भरने के बहाने स्कूल बुलाया था, जिसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है।
फॉर्म भरने के बहाने बुलाने का गंभीर आरोप
लापता छात्राओं के परिजनों का दावा है कि उन्हें स्कूल में छात्रवृत्ति के दस्तावेज पूरे करने के लिए कहा गया था। एक लापता छात्रा के भाई ने बताया कि उसने बुधवार दोपहर चारों छात्राओं को प्लस टू उच्च विद्यालय के गेट के अंदर जाते हुए अपनी आंखों से देखा था। इसके बाद से वे रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। हालांकि, जब परिजन गुरुवार को स्कूल पहुंचे, तो प्रधानाध्यापक ने किसी भी तरह का फॉर्म भरवाए जाने से साफ इंकार कर दिया। स्कूल के आधिकारिक रजिस्टर में भी मंगलवार और बुधवार को इन चारों छात्राओं की उपस्थिति अनुपस्थित दर्ज है, जिससे मामला और उलझ गया है।
संदिग्ध चैट और राजनीतिक पैरवी के आरोप
परिजनों ने मामले में स्कूल के कंप्यूटर ऑपरेटर विवेक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि जब पुलिस ने विवेक के मोबाइल की जांच की, तो उसमें कुछ संदिग्ध बातचीत और साक्ष्य मिले, जिसे पुलिस ने फिलहाल नजरअंदाज कर दिया है। आरोप यह भी है कि पुलिस पूछताछ के लिए विवेक को थाने ले गई थी, लेकिन स्थानीय वजीरगंज विधायक वीरेंद्र सिंह की कथित पैरवी के बाद उसे गुरुवार की रात छोड़ दिया गया।
दूसरी ओर, विधायक वीरेंद्र सिंह ने अपने ऊपर लगे तमाम राजनीतिक पैरवी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार की मानसिक स्थिति को देखते हुए वे कुछ भी बोल रहे हैं। विधायक ने स्पष्ट किया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और जो भी दोषी होगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की जांच और अलग-अलग एंगल
एसडीपीओ वजीरगंज अभिनव कुमार के अनुसार, चारों छात्राएं बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे घर से निकली थीं। इनमें से एक छात्रा के पास मोबाइल था, जिसे उसी समय सुबह बंद कर दिया गया था। गांव में सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण पुलिस को डिजिटल साक्ष्य जुटाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
तलाश के लिए पुलिस की तीन विशेष टीमें गठित की गई हैं, जिन्हें गया रेलवे स्टेशन, वजीरगंज और करजरा की तरफ रवाना किया गया है। रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर भी कोई ठोस सुराग नहीं मिला है, जिससे पुलिस यह अनुमान लगा रही है कि छात्राओं ने ट्रेन के बजाय सड़क मार्ग का विकल्प चुना होगा। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की तकनीकी जांच कर रही है ताकि संदिग्धों की पहचान कर संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सके। साथ ही, पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि परिजनों द्वारा घटना के करीब 28 घंटे बाद पुलिस को सूचना दी गई, जो इस मामले में एक गंभीर पहलू है।



