गयाजी। शहर स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले बुजुर्ग बीगन दास का शव अस्पताल कर्मियों की बड़ी भूल के कारण बदल गया। परिजनों का आरोप है कि उनके बुजुर्ग के शव को लावारिस समझकर अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया, जबकि उन्हें किसी दूसरे अज्ञात व्यक्ति का शव सौंप दिया गया।
सड़क हादसे में हुई थी बुजुर्ग की मौत
रफीगंज निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उनके करीब 60 वर्षीय मौसा बीगन दास गुरारू थाना क्षेत्र के बर्मा गांव के रहने वाले थे। उनकी कोई संतान नहीं थी और वे बेहद गरीब थे। शुक्रवार तड़के वे बकरियां चराने निकले थे, तभी एक अज्ञात चार पहिया वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। गंभीर हालत में उन्हें गुरारू पीएचसी से मगध मेडिकल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रात 8 बजे उनकी मौत हो गई।
रातभर रखवाली, सुबह मिला दूसरा शव
परिजनों ने रातभर मॉर्चरी के पास जागकर शव की रखवाली की। शनिवार सुबह करीब 11 बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब वे शव लेने पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्पताल कर्मियों ने बीगन दास की जगह एक लावारिस शव उन्हें सौंप दिया। जब परिजनों ने चेहरा देखकर आपत्ति जताई, तो अस्पताल प्रशासन ने हैरान करने वाला जवाब दिया कि बीगन दास के शव को लावारिस मानकर अंतिम संस्कार के लिए भेजा जा चुका है।
जलती चिता से बचाना पड़ा शव
यह सुनकर परिवार के होश उड़ गए। वे तुरंत वाहन लेकर विष्णुपद श्मशान घाट पहुंचे, जहां देखा कि चिता जल रही थी। परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई और जलती चिता से शव को सुरक्षित बाहर निकाला। स्थानीय पूर्व विधायक सतीश दास के हस्तक्षेप के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
मगध मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल लता द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल कर्मियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पुलिस की होती है, और सोमवार को लौटने के बाद इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



