सूरत। भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी क्षेत्र को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सूरत में वाणिज्य मंत्रालय और जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के संयुक्त तत्वावधान में एक उच्चस्तरीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया। इस शिविर में देश के रत्न एवं आभूषण निर्यात को वर्तमान 28 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2060 तक 100 अरब डॉलर (8.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा पेश की गई इस रणनीति के तहत क्षेत्र में रोजगार को दोगुना करके 1 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। साथ ही, देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में इस सेक्टर की हिस्सेदारी को 14% तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

चार मुख्य मिशनों पर रहेगा जोर:

  • ग्लोबल मार्केट एक्सेस: एफटीए (FTA) नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय तैयार आभूषणों की पहुंच बढ़ाना।
  • MSME स्केल-अप: छोटे एवं मध्यम उद्योगों को वित्तीय मदद, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और आसान बाजार पहुंच प्रदान करना।
  • सरल ट्रेड प्रक्रियाएं: क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और कस्टम्स प्रक्रियाओं को तेज, पारदर्शी व सुगम बनाना।
  • ब्रांड ‘क्राफ्टेड बाय इंडिया’: भारतीय संस्कृति व धरोहर को डिजाइनों में समाहित कर वैश्विक बौद्धिक संपदा (IP) और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड स्थापित करना।

GJEPC के रीजनल चेयरमैन जयंती सावालिया के अनुसार, प्राकृतिक हीरों में भारत का दबदबा बनाए रखते हुए अब लैब-ग्रोन डायमंड (LGD), गोल्ड रिफाइनिंग और हाई-एंड ब्रांडेड ज्वेलरी सेगमेंट के जरिए वैश्विक एड्रेसेबल मार्केट पर कब्जा जमाने की तैयारी है।

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