Karobar Desk: घर में रखा सोना अब सिर्फ बैंक लॉकर या तिजोरी में रखने तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र सरकार जल्द नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetisation Scheme) लाने की तैयारी में है। इस स्कीम के तहत लोग अपना सोना सिर्फ बैंकों में ही नहीं, बल्कि अधिकृत सर्राफा व्यापारियों (ज्वेलर्स) के पास भी जमा कर सकेंगे। इसके बदले उन्हें सालाना 2.25% से 2.5% तक ब्याज मिलने की संभावना है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर इस नई स्कीम का ऐलान कर सकती है। इसका मकसद घरों और मंदिरों में वर्षों से निष्क्रिय पड़े सोने को देश की अर्थव्यवस्था में शामिल करना और सोने के आयात पर निर्भरता कम करना है।
ज्वेलर्स भी बनेंगे कलेक्शन पार्टनर
नई स्कीम में देशभर के अधिकृत ज्वेलर्स को ‘कलेक्शन पार्टनर’ बनाया जा सकता है। यानी अब लोगों को सोना जमा करने के लिए सिर्फ बैंक नहीं जाना होगा। वे अपने आसपास के भरोसेमंद ज्वेलर्स के पास भी सोना जमा कर सकेंगे। अब तक यह सुविधा केवल चुनिंदा बैंकों तक सीमित थी।
सरकार को 1000 टन सोना जुटाने की उम्मीद
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का मानना है कि ज्वेलर्स को इस योजना से जोड़ने पर लोगों के लिए सोना जमा करना आसान होगा। इससे सरकार को बाजार से 1000 टन से अधिक सोना जुटाने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का सिर्फ 5% हिस्सा भी इस योजना में जमा हो जाए, तो बाजार में करीब 90 अरब डॉलर (लगभग 8.57 लाख करोड़ रुपए) की अतिरिक्त नकदी आ सकती है। इससे भारत को लगभग दो साल तक सोने का आयात कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही डॉलर की मांग घटेगी और रुपये को मजबूती मिल सकती है।
भारतीय घरों और मंदिरों में 50 हजार टन सोना
एसोचैम (ASSOCHAM) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय घरों और मंदिरों में करीब 50,000 टन सोना रखा हुआ है। इसकी अनुमानित कीमत 10 ट्रिलियन डॉलर (करीब 830 लाख करोड़ रुपए) है। यह दुनिया के कई देशों की पूरी अर्थव्यवस्था से भी अधिक मूल्य का सोना माना जाता है।
हर महीने 57 हजार करोड़ रुपए का सोना आयात
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है। वित्त वर्ष 2026 में देश ने हर महीने औसतन 60 टन सोना आयात किया। इस पर हर महीने करीब 6 अरब डॉलर (करीब 57 हजार करोड़ रुपए) खर्च हुए। सरकार चाहती है कि घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का अधिक उपयोग हो, ताकि आयात कम किया जा सके।
2015 की स्कीम क्यों रही फेल?
सरकार ने पहली बार 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम शुरू की थी। इसके तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा कर 2.25% से 2.5% तक सालाना ब्याज कमा सकते थे। हालांकि, योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
करीब 25,000 टन घरेलू सोने के मुकाबले 10 वर्षों में इस स्कीम के तहत सिर्फ 38 टन सोना ही जमा हो पाया। लोगों की कम भागीदारी को देखते हुए सरकार ने बाद में इसके मीडियम और लॉन्ग-टर्म डिपॉजिट बंद कर दिए थे।
पुरानी स्कीम के फेल होने की 4 बड़ी वजहें
- विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी योजना के सफल नहीं होने के पीछे कई कारण रहे।
- सरकार पर ब्याज और बढ़ती सोने की कीमत का वित्तीय बोझ बढ़ता गया।
भारतीय परिवार अपने पारंपरिक और पुश्तैनी गहनों को पिघलाना नहीं चाहते थे।
लोगों को टैक्स जांच और पुराने बिल मांगने का डर रहता था।
बैंकों को इस योजना से कोई खास व्यावसायिक लाभ नहीं मिल रहा था, इसलिए उन्होंने इसे ज्यादा बढ़ावा नहीं दिया।
नई स्कीम में क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव?
नई योजना में सरकार पुरानी कमियों को दूर करने की कोशिश कर रही है। इसके तहत ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाया जाएगा, जिससे लोगों के लिए सोना जमा करना आसान होगा। साथ ही ऐसी व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे लोगों में टैक्स जांच का डर कम हो और प्रक्रिया पहले से ज्यादा सरल बने।
लोगों को क्या होंगे फायदे?
- घर में रखा सोना सुरक्षित तरीके से जमा कर सकेंगे।
- सालाना 2.25% से 2.5% तक ब्याज मिलने की संभावना रहेगी।
- बैंक लॉकर की जरूरत और उसका खर्च कम हो सकता है।
- ज्वेलर्स के पास भी सोना जमा करने की सुविधा मिलेगी।
- मैच्योरिटी पर कैश या फिजिकल गोल्ड लेने का विकल्प मिल सकता है।
- सरकार का लक्ष्य सोने का आयात घटाकर विदेशी मुद्रा की बचत करना और अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

