“रामराज्य बैठे त्रैलोका। हरषित भए गए सब सोका॥”
श्रीरामचरितमानस के उत्तरकांड की इस चौपाई का अर्थ है “श्री राम के राजा बनते ही तीनों लोकों में आनंद छा गया, सभी प्रसन्न हो गए और सबके दुख दूर हो गए।” जिस तरह यह चौपाई रामराज्य की परिपूर्णता, शांति और सुशासन का प्रतीक है ठीक उसी तरह यही पंक्ति आज छत्तीसगढ़ के “सुशासन तिहार 2026” के लिए भी प्रासंगिक है। छत्तीसगढ़ में प्रशासन को जन-केन्द्रित बनाने की दिशा में सुशासन तिहार 2026 एक नई कोशिश के रूप में आकार ले रहा है। यह प्रशासनिक अभियान लोकतंत्र की आत्मा का पुनर्जागरण है जिसमें शासन जनता के दरवाजे तक पहुंचता है और समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करता है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह अभियान छत्तीसगढ़ में “रामराज्य” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देने का एक सु-प्रयास है।

1 मई से 10 जून 2026 तक चलने वाला सुशासन तिहार, छत्तीसगढ़ के हर गांव, हर वार्ड और हर नागरिक तक पहुंचने की योजना है। प्रशासनिक अमला अब दफ्तरों की सीमाओं से बाहर निकलकर सीधे जनमानस के बीच पहुंचकर “सरकार आपके द्वार” की परिकल्पना को साकार करेंगे।राज्य की साय सरकार की यह पहल उस पुरानी अव्यवस्था को तोड़ने का साहसिक प्रयास है जिसमें आम नागरिकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे।

विशेषताओं से भरपूर होगा “सुशासन तिहार 2026
समाधान शिविरों के माध्यम से त्वरित और समयबद्ध निराकरण ही सुशासन तिहार की सबसे बड़ी विशेषता होगी। भूमि विवाद, मनरेगा भुगतान, प्रमाण पत्र, बिजली-पानी, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याएं सुशासन तिहार 2026 के तहत अब प्राथमिकता के आधार पर हल की जाएंगी। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक आवेदन का निराकरण अधिकतम एक माह के भीतर हो ही जाना चाहिए। यह प्रशासनिक जवाबदेही “प्रक्रिया” से “परिणाम” की ओर शिफ्ट होने का एक सशक्त उदाहरण बनने जा रहा है क्योंकि अब उद्देश्य केवल आवेदन लेना ही नहीं होगा बल्कि उसके समाधान तक पहुंचाने की अनिवार्यता भी होगी। हर आवेदक को उसकी शिकायत की स्थिति की जानकारी देना पारदर्शिता के तहत मानी जाएगी। डिजिटल ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग सिस्टम और समीक्षा बैठकों के जरिए लापरवाही या देरी रोकी जाएगी। यह कदम ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक मील का पत्थर बनने जा रही है।

सुशासन तिहार 2026 को सफल बनाने में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी का भी अपना महत्व होगा। सुशासन तिहार 2026 में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी तक सभी इस अभियान में सीधे तौर पर जुड़ेंगे। जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और मौके पर ही उसका समाधान देना, लोकतंत्र के उस स्वरूप को दर्शाता है जिसमें सत्ता और समाज के बीच की सारी दूरियाँ ख़त्म हो जाती हैं।

पुनीत है सुशासन तिहार 2026 का उद्देश्य
सुशासन तिहार 2026 का उद्देश्य लंबित मामलों का त्वरित निपटान भी होगा जिसके लिए राज्य सरकार के द्वारा 30 अप्रैल तक सभी पुराने मामलों को सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्देश से इस बात का पता चलता है कि सरकार नई योजनाओं के प्रचार के साथ ही पुरानी समस्याओं के समाधान को भी उतनी ही गंभीरता से लेती हैं जो प्रशासनिक विश्वसनीयता को और भी मजबूत करने का काम करेगा।

गरीब और वंचित वर्ग पर विशेष ध्यान देकर इस अभियान को और भी समावेशी बनाया जा रहा है। इस अभियान में राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। “अंत्योदय” की भावना को मूर्त रूप देता हुआ सुशासन तिहार सामाजिक न्याय के उस सिद्धांत को सशक्त करेगा जिसमें विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान का प्रभाव और भी व्यापक और विराट देखाने को मिलेगा। बिजली सुधार, हैंडपंप मरम्मत, और मनरेगा भुगतान जैसे मुद्दे जो सीधे ग्रामीण जीवन से जुड़े हैं। इनसे जुड़ी सस्याओं के समाधान से न केवल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार होगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सुशासन तिहार गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है। यह भी सत्य है कि किसी भी बड़े अभियान की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है और सुशासन तिहार 2026 के सामने भी चुनौतियों का अंबार होंगी यदि इन पर गंभीरता से काम किया गया तो सुशासन तिहार 2026 पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
सुशासन तिहार 2026 केवल एक कार्यक्रम नहीं, एक संदेश है
सुशासन तिहार 2026 का संदेश है कि लोकतंत्र में जनता केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि भागीदार भी है। जब सरकार जनता के साथ मिलकर काम करती है तब विकास आंकड़ों के अलावा लोगों के जीवन में भी दिखाई देता है। यदि यह अभियान अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल होता है तो यह निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को, ‘सुशासन’ की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

