गोपालगंज। जिले को सीधे बेतिया (पश्चिम चम्पारण) से जोड़ने वाले गंडक नदी पर बने ऐतिहासिक महासेतु पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पुल के मुख्य स्पाइन जॉइंट में एक बड़ी दरार देखी गई है। मामले की संवेदनशीलता और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इस पुल पर भारी वाहनों के आवागमन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। हालांकि, आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए छोटे और हल्के वाहनों का परिचालन फिलहाल जारी रखा गया है।
प्रशासन ने लिया स्थिति का जायजा
पुल में दरार आने की खबर जैसे ही फैली, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा, एसडीपीओ अनिल कुमार, सीओ रजत बरनवाल और कुचायकोट के सीओ मणी भूषण कुमार सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की टीम ने प्रभावित हिस्से का बारीकी से निरीक्षण किया।सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन ने बिना देरी किए बस, ट्रक और अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए पुल के रास्ते को ब्लॉक कर दिया। प्रशासन का मानना है कि भारी वाहनों के दबाव से पुल को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है, जिससे कोई बड़ा हादसा होने का डर था।
जांच के लिए आईआईटी पटना को बुलावा
डीएम पवन कुमार सिन्हा ने मीडिया को बताया कि पुल के जॉइंट स्पैन में आई खराबी एक गंभीर संरचनात्मक समस्या है, जो भविष्य में बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए प्रशासन ने आईआईटी पटना के सिविल इंजीनियरिंग विंग और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों से संपर्क साधा है।विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम जल्द ही महासेतु का भौतिक निरीक्षण करेगी। टीम द्वारा पुल की मजबूती का आकलन करने और विस्तृत मरम्मत रिपोर्ट सौंपने के बाद ही भारी वाहनों को दोबारा शुरू करने पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
व्यापार और कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है यह पुल
गंडक नदी पर बना यह महासेतु उत्तर बिहार की लाइफलाइन माना जाता है।लगभग 1920 मीटर लंबे इस महासेतु के निर्माण में करीब 330 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी।इस पुल के बनने से गोपालगंज और बेतिया के बीच का सीधा संपर्क बहाल हुआ था, जिससे दोनों जिलों के बीच की दूरी में 120 किलोमीटर की भारी कमी आई थी। इसके बंद होने से अब लोगों को लंबा चक्कर काटना पड़ेगा।
पहले भी विवादों और खतरों में रहा है एप्रोच रोड
यह पहली बार नहीं है जब इस पुल की संरचना पर सवाल उठे हैं। इससे पहले साल 2020 में भीषण बाढ़ और गंडक नदी के तेज बहाव के कारण इसके एप्रोच रोड में दरार आ गई थी और उसका एक हिस्सा बह गया था, जिसे बाद में रिपेयर किया गया। इसके बाद भी संपर्क मार्गों को दुरुस्त और मजबूत बनाए रखने के लिए साल 2023 और 2024 में नए सिरे से सड़क निर्माण और सुदृढ़ीकरण के कार्य किए गए थे। लेकिन अब मुख्य स्पाइन जॉइंट में दरार आने से स्थानीय लोगों और यात्रियों में चिंता बढ़ गई है।

