लवकुश बैरागी, आगर मालवा (झालावाड़)। आगर मालवा की चर्चित एनडीपीएस कार्रवाई अब कानूनी पेंच में उलझ गई है। चौमहला न्यायालय ने इस मामले में मध्यप्रदेश पुलिस टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं, वहीं स्थानीय पुलिस ने न्यायालय को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि आदेश में जिन धाराओं का उल्लेख है, वे असंज्ञेय प्रकृति की हैं और ऐसे मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की आगर पुलिस ने डग क्षेत्र के घाटाखेड़ी में 28 जनवरी को कार्रवाई करते हुए ड्रग्स की फैक्ट्री से 5 करोड़ की एमडीएमए पकड़ी थी। इस कार्रवाई को लेकर परिवादी पक्ष ने न्यायालय में परिवाद पेश किया था। मामले की जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद चौमहला न्यायालय ने कार्रवाई करने वाली आगर पुलिस टीम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए।
न्यायालय के आदेश सामने आते ही मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में हलचल मच गई। हालांकि बाद में पुलिस ने आदेश का परीक्षण कर न्यायालय को अवगत कराया कि आदेश में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया है, वे असंज्ञेय श्रेणी में आती हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान नहीं है। इसके लिए कानूनन अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है।
एएसपी की जांच में सामने आए कई विरोधाभास
झालावाड़ एसपी ने इस मामले की जांच एएसपी भागचंद मीणा को सौंपी थी। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस कार्रवाई को लेकर पुलिस ने विस्तृत तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती का दावा किया था, उससे संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। एमपी पुलिस ने प्रेसवार्ता में बताए गए कई सामान जब्ती दस्तावेजों में दर्ज नहीं पाए गए। साथ ही कार्रवाई के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने का दावा भी जांच में पुष्ट नहीं हो सका।
अदालत में अधिवक्ताओं ने रखे तकनीकी साक्ष्य
11 जून को परिवादी हमीद खान की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने न्यायालय में विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने कहा कि एनडीपीएस जैसी संवेदनशील कार्रवाई में स्थानीय राजस्थान पुलिस को सूचना नहीं देना, स्वतंत्र गवाहों को राजस्थान के बजाय आगर से साथ ले जाना, तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती की वीडियोग्राफी नहीं करना तथा प्रक्रिया संबंधित कई नियमों का पालन नहीं किया जाना कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है
झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने घाटाखेड़ी में एनडीपीएस की कार्रवाई की थी। इस मामले में चौमहला कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन वे असंज्ञेय प्रकृति की हैं। ऐसे मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती।

