Abdul Sayed Could Be US First Muslim Senator: अब्दुल सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन सकते हैं। अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन राज्य में अमेरिकी सीनेट प्राइमरी चुनाव में इजराइल समर्थक सांसद हेली स्टीवंस को हरा दिया है। अब्दुल सैयद की यह जीत इजराइल समर्थक लॉबी अमेरिकन इजरायन पब्लिक अफेयर्स कमिटी (AIPAC) और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका और साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी में प्रोग्रेसिव राजनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

अब अल-सैयद अब नवंबर में होने वाले आम चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का सामना करेंगे। अगर वह यहां चुनाव जीतते हैं तो अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बन जाएंगे।

डेमोक्रेटिक पार्टी के अमेरिकी सीनेट प्राइमरी चुनाव में AIPAC की रिकॉर्ड फंडिंग भी हेली स्टीवंस को हार से नहीं बचा सकी। हेली स्टीवंस के समर्थन में AIPAC और उससे जुड़े समूहों ने रिकॉर्ड स्तर पर करोड़ों डॉलर खर्च किए. लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजा दिखाता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के एक बड़े वर्ग में AIPAC के प्रभाव को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। यही वजह है कि अल-सैयद ने जमीनी अभियान और छोटे दानदाताओं के सहारे जीत हासिल की।

कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

41 वर्षीय अब्दुल अल-सैयद का जन्म मिशिगन में हुआ था। वे मिस्र मूल के प्रवासी परिवार से आते हैं। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पब्लिक हेल्थ में पीएचडी की है। वह पहले डेट्रॉइट स्वास्थ्य विभाग और वेन काउंटी के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग का नेतृत्व भी कर चुके हैं। 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि जीत नहीं सके थे। अब्दुल अल-सैयद की पत्नी का नाम सारा जुकाकू है.वह पेशे से मनोचिकित्सक है। दंपति की दो बेटियां हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए क्या मायने

मिशिगन अमेरिका का एक अहम स्विंग स्टेट है और सीनेट की यह सीट डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अल-सैयद की जीत को पार्टी के भीतर वामपंथी और प्रोग्रेसिव विचारधारा के मजबूत होते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

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