हेमंत शर्मा, इंदौर। अबू धाबी से इंदौर तक अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी के मामले में राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में विस्तृत चालान पेश कर दिया है। जिसमें पूरे तस्करी सिंडिकेट के काम करने का तरीका, सभी आरोपियों की भूमिका और सोना एयरपोर्ट से बाहर निकालने की साजिश का खुलासा किया गया है।
डीआरआई के अनुसार, 3 अगस्त 2026 को एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-248 से अबू धाबी से इंदौर पहुंचे यात्री के जरिए करीब 1000.20 ग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है, तस्करी कर भारत लाया गया। जांच में सामने आया कि सोने को चांदी जैसे दिखने वाले दो धातु के कड़ों (Silver Coloured Metal Kadas) के भीतर छिपाया गया था, ताकि सीमा शुल्क अधिकारियों की नजर से बचाया जा सके।
कारोबारी ने रची पूरी साजिश, 5 लोगों का नेटवर्क सक्रिय
डीआरआई की जांच के मुताबिक, इंदौर के कारोबारी संजय मुंजे को पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। आरोप है कि उसने विदेशी सोने की तस्करी की पूरी योजना बनाई और अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी।
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जांच में सामने आया कि एक आरोपी को कैरियर बनाकर अबू धाबी भेजा गया, जो सोना लेकर फ्लाइट से इंदौर पहुंचा। एयरपोर्ट पर तैनात एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक कर्मचारी पर आरोप है कि उसने विमान से उतरने के बाद सोना प्राप्त कर उसे सीमा शुल्क जांच से बचाते हुए बाहर निकालने की भूमिका निभाई। वहीं एयरपोर्ट हैंडलिंग एजेंसी के पूर्व कर्मचारी और एक अन्य सहयोगी पर निगरानी संबंधी सूचनाएं उपलब्ध कराने तथा पूरी तस्करी को आसान बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
प्रति यात्रा मिलते थे 10 हजार रुपये
चालान में दावा किया गया है कि तस्करी नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी को प्रत्येक यात्रा के बदले 10 हजार रुपये दिए जाते थे। उसका काम डीआरआई और अन्य एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखना और समय रहते तस्करों तक जानकारी पहुंचाना था, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके।
पहले भी कर चुके हैं सोने की तस्करी
डीआरआई ने अदालत को बताया है कि जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि आरोपी पहले भी इसी तरह की साजिश के तहत विदेशी सोना भारत ला चुके हैं। एजेंसी का दावा है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक संगठित तस्करी नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। अब इसके पुराने मामलों, आर्थिक लेन-देन, यात्रा मार्गों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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इन पांच को बनाया गया आरोपी
डीआरआई ने इस मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया है। संजय मुंजे (इंदौर) – कथित मास्टरमाइंड, अमन गहलोत, गोविंद पोरवाल (कैरियर), वासुदेव बरनाले और अजय कुमार सेन को आरोपी बनाया गया हैं। सभी को सीमा शुल्क अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। डीआरआई ने आरोपियों की न्यायिक रिमांड की मांग करते हुए कहा है कि मामले में अभी कई अहम पहलुओं की जांच बाकी है और इस तस्करी सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
अभी और बड़े खुलासों की संभावना
डीआरआई का कहना है कि जांच अभी जारी है। एजेंसी अब इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, पुराने कैरियर, अंतरराष्ट्रीय संपर्क, यात्रा रूट और सोने की सप्लाई चेन की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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