अनुज पांडेय/गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है जहां भोरे थाना क्षेत्र के छठियाव गांव में जहरीले सांप के काटने से एक 17 वर्षीय किशोरी की असामयिक मौत हो गई। मृतका की पहचान गांव के ही रामपुकार राम की पुत्री गायत्री कुमारी के रूप में की गई है। इस घटना के बाद से मृतका के परिवार में कोहराम मच गया है और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

​घर में सोने के दौरान गर्दन पर सांप ने काटा

​परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा उस वक्त हुआ जब 17 वर्षीय गायत्री कुमारी रोजाना की तरह रात में अपने घर के अंदर चौकी पर सो रही थी। इसी दौरान एक अत्यधिक जहरीले सांप ने उसकी गर्दन पर काट लिया। सांप के काटते ही जहर शरीर में फैलने लगा, जिससे गायत्री की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और वह कुछ ही देर में अचेत हो गई। चीख-पुकार सुनकर जगे परिजनों को जब सर्पदंश की बात पता चली तो घर में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।

​पीएमसीएच किया गया रेफर

​बेहोशी की हालत में परिजन आनन-फानन में किशोरी को लेकर नजदीकी भोरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया लेकिन जहर का असर बहुत ज्यादा होने के कारण उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया।​सदर अस्पताल में भी डॉक्टरों ने किशोरी को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। स्थिति लगातार नाजुक बनी रही जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे उच्च स्तरीय चिकित्सा और बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित पीएमसीएच रेफर कर दिया।

​रास्ते में ही तोड़ा दम, गांव में पसरा सन्नाटा

​परिजन एम्बुलेंस के जरिए किशोरी को लेकर पटना के लिए रवाना हुए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पटना पहुंचने से पहले ही रास्ते में गायत्री ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।माता-पिता और भाई-बहनों की चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया है। गांव के लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।

​ग्रामीणों ने की जागरूकता और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की मांग

​इस हृदयविदारक घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति थोड़ा आक्रोश भी देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम और आपातकालीन चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके और किसी और घर का चिराग न बुझे।