गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं आनंदीबेन पटेल ने राजनीति में एक लंबा और शानदार सफर तय करने के बाद संवैधानिक पदों पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। 2018 में राजभवन की जिम्मेदारी संभालने वाली आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के रूप में लगातार 7 वर्ष का समय पूरा कर एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया है। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में किसी भी राज्यपाल को इतना लंबा कार्यकाल नहीं मिला है।

शिक्षिका से राज्यपाल तक का प्रेरक सफर

21 नवंबर 1941 को जन्मीं 84 वर्षीय आनंदीबेन पटेल की पहचान एक सख्त प्रशासक और अनुशासित राजनेता की रही है। राजनीति में कदम रखने से पहले वह एक स्कूल में शिक्षिका और बाद में प्रधानाध्यापक थीं। शिक्षक रहते हुए उन्होंने एक बार नर्मदा नदी में छलांग लगाकर दो डूबती बच्चियों की जान बचाई थी, जिसके लिए उन्हें वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

आगे चलकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के माध्यम से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया। वह सबसे पहले राज्यसभा सदस्य बनीं और उसके बाद गुजरात की पाटन तथा घाटलोडिया विधानसभा सीटों से विधायक चुनी गईं। गुजरात सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारियां संभालने के बाद, वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर वे गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, बतौर सीएम उनका कार्यकाल लगभग दो साल (2 साल 77 दिन) का ही रहा।

यूपी की एकमात्र फुलटाइम महिला गवर्नर

संवैधानिक पद की यात्रा में वह 19 जनवरी 2018 को मध्य प्रदेश की राज्यपाल नियुक्त की गईं। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। इसके बाद 29 जुलाई 2019 को उन्होंने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के 28वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली।

उत्तर प्रदेश के इतिहास में अब तक कुल 25 राज्यपाल हुए हैं, जिनमें से आनंदीबेन पटेल एकमात्र ऐसी महिला राज्यपाल हैं जिन्होंने अपना पूर्ण कार्यकाल पूरा किया और अब तक की सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली गवर्नर बनीं।

उत्तर प्रदेश के लंबे समय तक सेवा देने वाले राज्यपाल:

  • आनंदीबेन पटेल: 7 वर्ष (जुलाई 2019 – वर्तमान)
  • बेजवाडा गोपाला रेड्डी: 5 वर्ष 60 दिन
  • चंद्रेश्वर प्रसाद नारायण सिंह: 5 वर्ष 31 दिन
  • टी. वी. राजेश्वर: 5 वर्ष 19 दिन
  • राम नाईक: 5 वर्ष 7 दिन

जनसेवा और सामाजिक सरोकार

आनंदीबेन पटेल अपने कड़े अनुशासन और समयबद्धता के लिए जानी जाती हैं। गुजरात में ‘कन्या केलवणी योजना’ के तहत उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा बढ़ाने के लिए खुद तपती धूप में गांवों का दौरा किया था। यूपी में भी राज्यपाल रहते हुए उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करने, क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन और बेटियों के स्वास्थ्य के लिए विशेष अभियान चलाए हैं।

पारिवारिक और राजनीतिक विरासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेहद भरोसेमंद मानी जाने वाली आनंदीबेन पटेल के दो बच्चे हैं—बेटा संजय पटेल और बेटी अनार पटेल। संजय पटेल व्यवसायी हैं, जबकि अनार पटेल एक बिजनेसवूमेन के साथ-साथ लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। खोडलाधाम में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि अनार पटेल अपनी मां की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए जल्द ही मुख्यधारा की राजनीति में कदम रख सकती हैं।

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