सूरत/अहमदाबाद: अंगदान में हर मिनट और हर सेकंड की बहुत कीमत होती है। देश में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी मरीज को नया जीवन देने के लिए एक इंसानी दिल (Heart) को हवाई जहाज या कार से नहीं, बल्कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से एक शहर से दूसरे शहर पहुँचाया गया। सूरत से अहमदाबाद के बीच यह पूरा ऑपरेशन किसी थ्रिलर फिल्म की तरह चला और वक्त रहते दिल अस्पताल पहुँच गया।
कैसे तय हुआ 250 किलोमीटर का सफर?
सूरत के एक अस्पताल से दिल निकाला गया, जिसे अहमदाबाद के प्रसिद्ध यूएन मेहता अस्पताल पहुँचाना था। दोनों शहरों के बीच 250 किलोमीटर की दूरी है। दिल को सही समय पर पहुँचाने के लिए चार टीमों ने मिलकर काम किया—गुजरात पुलिस, रेलवे, RPF और डॉक्टरों की टीम।
सूरत में ग्रीन कॉरिडोर: अस्पताल से सूरत रेलवे स्टेशन तक की सड़क पर ट्रैफिक रोककर ‘ग्रीन कॉरिडोर’ (खाली रास्ता) बनाया गया, ताकि एम्बुलेंस बिना रुके स्टेशन पहुँच सके।
वंदे भारत की रफ्तार: ट्रेन में दिल को बहुत संभालकर रखा गया। वंदे भारत ट्रेन ने 250 किमी का सफर 217 मिनट में पूरा कर लिया।
अहमदाबाद में फुर्ती: जैसे ही ट्रेन अहमदाबाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर रुकी, पुलिस ने तुरंत रास्ते को खाली कराया और दिल को सीधे अस्पताल पहुँचा दिया।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) में समय की सबसे ज्यादा कीमत होती है। वंदे भारत ट्रेन की तेज़ रफ्तार और सभी विभागों के सही तालमेल की वजह से यह काम मुमकिन हो पाया। उन्होंने अस्पताल की टीम को अब तक 77 सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करने के लिए बधाई भी दी।
काम की बात: शरीर से बाहर दिल को कैसे सुरक्षित रखते हैं?
शरीर से बाहर आने के बाद भी दिल को खराब होने से बचाने के लिए डॉक्टर कुछ खास तकनीक अपनाते हैं।
बर्फ जैसा ठंडा माहौल: दिल को निकालते ही 4°C तापमान वाले बहुत ठंडे माहौल में रखा जाता है।
खास दवा से सफाई: दिल की खून की नलियों को एक खास ठंडे घोल से धोया जाता है, जिससे दिल को ऑक्सीजन की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है।
6 घंटे का समय: दिल को शरीर से बाहर निकलने के बाद 6 घंटे के भीतर दूसरे मरीज के शरीर में लगाना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
क्यों खास है यह खबर?
अब तक भारत में दिल या कोई अन्य अंग ले जाने के लिए एयर एम्बुलेंस (हेलिकॉप्टर/प्लेन) या फिर सड़क का सहारा लिया जाता था। लेकिन पहली बार ट्रेन के ज़रिए ऐसा करके रेलवे ने यह साबित कर दिया है कि आपातकालीन स्थिति में वंदे भारत जैसी ट्रेनें भी लोगों की जान बचाने में काम आ सकती हैं।
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