अजय सैनी, भिवानी. देवसर चुंगी स्तिथ प्राचीन गुरुद्वारा सिंह सभा में शहीदों के सरताज, सिखों के पांचवें गुरु गुरु अर्जुन देव का शहीदी गुरुपर्व बड़ी श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संगत के लिए मीठे ठंडे पानी की छबील तथा गुरु का लंगर लगाया गया। गुरुद्वारा परिसर में गुरबाणी कीर्तन और श्री सुखमनी साहिब के पाठ का आयोजन भी किया गया।
शहीदी गुरपर्व के उपलक्ष में पिछले 15 दिनों से लगातार सुखमनी साहिब के लड़ीवार पाठ संगतो की तरफ से किये जा रहे थे.

प्राचीन गुरुद्वारा सिंह सभा के मुख्य ग्रंथी भाई गुरबचन सिंह ने संगत को गुरु जी की शहीदी के बारे में विस्तार से गुरबाणी के माध्यम से बताया कि गुरु अर्जुन देव ने अत्याचार और अन्याय के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। भीषण यातनाएं सहने के बावजूद उनके मुख से केवल यही शब्द निकले— “तेरा भाना मीठा लागे”।
यह वाक्य आज भी मानवता को ईश्वर की रज़ा में प्रसन्न रहने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी की शहादत का इतिहास त्याग, बलिदान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का प्रतीक है। शहीदी दिवस हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने तथा मानवता की सेवा का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से अपने गौरवशाली इतिहास को पढ़ने और उससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

इस अवसर पर प्राचीन गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान प्रेम मुटरेजा, कैशियर गुलशन चानना ,सचिव विजय सनेजा,सरदार बलदेव सिंह, सुदेश सिंह, ज्ञानी प्रेम सिंह, ,ज्ञान सिंह बागड़ी, गगनीश चावला, धर्मबीर बतरा, जोगेंद्र रखेजा, कृष्ण तनेजा, विशाल मुटरेजा, पूजा कौर, हरबंस कौर, अलका, शोभा, सुमन, निधि, श्रेष्ठा, मोहित सहित सेवादार ने सेवा की।
मनप्रीत कौर, पूजा कौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।