गुड़गांव। Haryana में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। Respire Living Sciences की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि Gurugram के सेक्टर-51 में कूड़े के बड़े डंपिंग सेंटर के कारण जहरीली अमोनिया गैस का खतरनाक हॉटस्पॉट बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से अधिक दर्ज किया गया है, जबकि अमोनिया गैस के स्तर में 8 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कृषि गतिविधियों और पशुधन से निकलने वाली अमोनिया गैस प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच 31 निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के विश्लेषण में पीएम 2.5 का औसत स्तर 62.51 से 77.38 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया, जबकि राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

वहीं पीएम 10 का स्तर 123.44 से 141.68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया, जो तय सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से दोगुना है।

रिपोर्ट में Gurugram, Faridabad, Bahadurgarh और Manesar की दक्षिणी पट्टी को सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र बताया गया है। गुरुग्राम सेक्टर-51 में वर्ष 2025 के दौरान अमोनिया का सालाना औसत 138.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित सीमा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से काफी अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 में सेक्टर-51 में लगातार तीन दिनों तक अमोनिया का स्तर 24 घंटे की 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर सीमा से ऊपर पहुंच गया था।

10 नए निगरानी सेंसर लगाने की सिफारिश

रिपोर्ट में हरियाणा में अमोनिया प्रदूषण की निगरानी के लिए 10 सेंसर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की सिफारिश की गई है। इनमें पांच सेंसर Gurugram, Faridabad और Sonipat जैसे शहरी क्षेत्रों में, जबकि पांच सेंसर Hisar, Sirsa और Jind जैसे पशुधन प्रधान जिलों में लगाने का सुझाव दिया गया है।

Ronak Sutaria ने कहा कि हरियाणा में अलग अमोनिया निगरानी तंत्र की तत्काल जरूरत है, जिसे Haryana State Pollution Control Board, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के सहयोग से लागू किया जा सकता है।