नई दिल्ली। हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए सभी नौ आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया है।
विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने आदेश जारी करते हुए रॉबर्ट वाड्रा सहित सभी नामजद आरोपियों को 16 मई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब कि, ईडी ने इस मामले में 17 जुलाई 2025 को रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान वाड्रा के कानूनी पक्ष ने दलील दी कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस मामला नहीं बनता है। इस प्रकरण में ईडी अब तक वाड्रा से तीन बार पूछताछ कर चुकी है।
क्या हैं मामला?
यह मामला साल 2008 का है जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे। आरोपों के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने फरवरी 2008 में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। जमीन के सौदे के कुछ समय बाद ही तत्कालीन हुड्डा सरकार ने इस भूमि के 2.7 एकड़ हिस्से पर व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस प्रदान कर दिया।
लाइसेंस मिलने के बाद स्काईलाइट कंपनी ने इस जमीन को विकसित करने के बजाय डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी को लगभग 50 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल करते हुए वाड्रा की कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया।
कानूनी कार्रवाई का क्रम
इस मामले में लंबी जांच के बाद वर्ष 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज था । इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। अब अदालत द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

