कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। EXCLUSIVE: मध्यप्रदेश के करीब एक लाख नर्सिंग छात्रों के लिए 25 अगस्त का दिन बेहद अहम है। BSC नर्सिंग, GNM नर्सिंग और ANM छात्रों की परीक्षा सहित अन्य जरूरी मसलों पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई होनी है। ग्वालियर-चंबल के करीब 70 नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े हजारों छात्रों की नजर भी इस सुनवाई पर टिकी है। लंबे समय से परीक्षा, रिजल्ट, मान्यता और स्कॉलरशिप की समस्याओं से जूझ रहे छात्रों को अब देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को 17P- Educational Institutions – Admission, Management, Grant, Recognition श्रेणी में दर्ज किया गया है। यानी मामला नर्सिंग शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, प्रबंधन, अनुदान और मान्यता से जुड़े विषयों की श्रेणी में रखा गया है। इस याचिका में दिलखुश कुमार, आरती कुल्हाड़िया, मनोज कुमार, खुशबू भास्कर, काजल केवट, हरिओम कुशवाह और जितेंद्र सिंह याचिकाकर्ता हैं। वहीं प्रतिवादियों में मध्यप्रदेश शासन और प्रमुख सचिव सहित अन्य पक्ष शामिल हैं।

लड़ाई सिर्फ परीक्षा और परिणाम के लिए नहीं- छात्र

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में नर्सिंग छात्र आंदोलन कर रहे हैं। ग्वालियर में NSUI के बैनर तले BSC नर्सिंग और GNM नर्सिंग के छात्र कटोरा ताल स्थित फ्लैग पॉइंट पर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं और उन्होंने अपने प्रदर्शन स्थल को ‘नर्सिंग का जंतर-मंतर’ नाम दिया है। छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ परीक्षा और परिणाम के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार, करियर और भविष्य की सुरक्षा के लिए है।

छात्रों के मुताबिक GNM का तीन साल का कोर्स छह साल तक खिंच रहा है, जबकि BSC नर्सिंग का चार साल का कोर्स सात साल तक पहुंच गया है। BSC नर्सिंग के 2020, 2021 और 2022 सत्र और GNM के 2021 और 2022 सत्र की परीक्षाओं और परिणामों को लेकर भी छात्र लंबे समय से परेशान हैं। छात्रों का आरोप है कि कई नर्सिंग कॉलेजों के संचालन, फैकल्टी और व्यवस्थाओं में अनियमितताएं हैं। वहीं कॉलेज प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण कई छात्रों की स्कॉलरशिप अटकने की बात भी सामने आई है।

छात्रों की प्रमुख मांगें

  • लंबित परीक्षा परिणाम जल्द जारी हों।
  • लंबित परीक्षाओं की तारीख घोषित कर समयबद्ध कार्यक्रम जारी हो।
  • सभी पात्र छात्रों को बिना शर्त परीक्षा में शामिल किया जाए।
  • कॉलेज की लापरवाही से रुकी स्कॉलरशिप वाले छात्रों की फीस माफ हो।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी उम्मीद

अब छात्रों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। सवाल सिर्फ उन परीक्षाओं और परिणामों का नहीं है, जो वर्षों से लंबित हैं, बल्कि उन हजारों युवाओं के भविष्य का भी है जिन्होंने नर्सिंग को अपना करियर चुना है। तीन साल की पढ़ाई छह साल में और चार साल का कोर्स सात साल में पूरा होना शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़ा करता है। नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्र में पढ़ने वाले छात्रों की शिक्षा और प्रशिक्षण समय पर पूरा होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध भविष्य के रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए तैयार होने वाले प्रशिक्षित मानव संसाधन से है।

अब 25 अगस्त की सुनवाई पर छात्रों की निगाहें हैं। ग्वालियर के करीब 56 नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े हजारों छात्रों समेत प्रदेशभर के एक लाख से अधिक छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत के सामने उनकी वर्षों पुरानी समस्या का कोई ठोस रास्ता निकलेगा। छात्रों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने शिक्षा के अधिकार और भविष्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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