रेवाड़ी में प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों और पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए 'ज्ञान भारतम् मिशन' के तहत सर्वेक्षण शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य 15 जून तक डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है।
धनेश, रेवाड़ी। जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए प्रशासन ने ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य जिले भर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ अभिलेखों की पहचान कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। यह सर्वेक्षण कार्य 16 मार्च से प्रारंभ हो चुका है और आगामी 15 जून तक निरंतर जारी रहेगा। इस पहल के माध्यम से सरकार देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए डिजिटल रूप में सुलभ बनाना चाहती है।
75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों को मिलेगी प्राथमिकता
इस अभियान के तहत मुख्य रूप से उन पांडुलिपियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जो 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण का कार्य केवल सरकारी पुस्तकालयों या विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृत पाठशालाओं, मंदिरों, गुरुद्वारों, मठों और अन्य धार्मिक स्थलों में उपलब्ध पांडुलिपियों का भी दस्तावेजीकरण किया जाएगा। सर्वे के दौरान इन दुर्लभ अभिलेखों की भौतिक स्थिति का सूक्ष्मता से आकलन किया जाएगा ताकि उनके संरक्षण के लिए चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में पांडुलिपि धारकों के स्वामित्व का पूर्ण सम्मान किया जाएगा और उनकी गोपनीयता व अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
नागरिकों की सहभागिता और भविष्य की रूपरेखा
डीसी ने आम जनता से इस मिशन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। यदि किसी नागरिक के पास कोई प्राचीन पांडुलिपि उपलब्ध है, तो वे सीधे आधिकारिक वेबसाइट https://gyanbharatam.com/ या गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध Gyan Bharatam मोबाइल ऐप के माध्यम से इसकी जानकारी साझा कर सकते हैं। चिन्हित की गई पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में स्थान दिया जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। इस तीन महीने के लक्ष्य के बाद, संरक्षण के अगले चरण शुरू होंगे, जो जिले की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान करेंगे।

