दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) के 11 सदस्यों को क्लब की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से इन सदस्यों की याचिका पर विचार करने को कहा। याचिकाकर्ताओं ने क्लब की 27.3 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार द्वारा अपने कब्जे में लिए जाने और इसके बाद की गई बेदखली की कार्रवाई को चुनौती दी है। क्लब के सदस्यों की ओर से दायर याचिका में केंद्र सरकार के जमीन अपने कब्जे में लेने के फैसले के साथ-साथ इसके बाद शुरू की गई बेदखली की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। सदस्यों का कहना है कि इस कार्रवाई से उनके क्लब से जुड़े अधिकार प्रभावित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब दिल्ली हाई कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा।
हाई कोर्ट ने सदस्यों की याचिका पर सुनवाई से किया था इनकार
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष क्लब के सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सिंह के मुताबिक, हाई कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार की ओर से क्लब की जमीन को अपने कब्जे में लेने के फैसले को चुनौती देने का अधिकार केवल क्लब के पास है। हाई कोर्ट ने सदस्यों से कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में स्पष्टीकरण ले सकते हैं कि क्या वे व्यक्तिगत रूप से भी इस मामले में याचिका दायर कर सकते हैं।
सदस्यों को हाई कोर्ट जाने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों को अपनी याचिका के साथ दिल्ली हाई कोर्ट जाने की अनुमति दे दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार या मामले से जुड़ी दूसरी पार्टी याचिका की स्वीकार्यता समेत अन्य कानूनी आपत्तियां उठाने के लिए स्वतंत्र होगी। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सदस्यों को हाई कोर्ट में अपनी बात रखने का रास्ता खोल दिया है, लेकिन याचिका की मेरिट पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इससे पहले पीठ को बताया था कि फिलहाल क्लब का संचालन केंद्र सरकार की ओर से गठित एक समिति कर रही है। ऐसे में क्लब स्वयं केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली कानूनी कार्रवाई शुरू करने की स्थिति में नहीं है। वहीं, 3 सितंबर को एक अलग मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि सफदरजंग रोड स्थित परिसर से क्लब को हटाने के संबंध में 16 सितंबर तक उसके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हाई कोर्ट में पहले से लंबित हैं याचिकाएं
दिल्ली हाई कोर्ट क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के एस्टेट ऑफिसर की ओर से 29 जून को क्लब प्रबंधन को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई थी। वहीं, विपिन अग्रवाल और क्लब के 10 अन्य सदस्यों ने अधिवक्ता नितिन सलूजा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें L&DO की ओर से 22 मई को जारी किए गए ‘रिजम्पशन नोटिफिकेशन’ यानी जमीन वापस लेने के नोटिस और एस्टेट ऑफिसर द्वारा 29 जून को जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की मांग की गई थी।
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