चंडीगढ़। हरियाणा में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर और सर्वखाप अधिवेशन में कई सामाजिक और कानूनी मुद्दों को लेकर बड़े प्रस्ताव पारित किए गए। अंतिम दिन हुई पत्रकारवार्ता में खाप प्रतिनिधियों ने बताया कि 250 से अधिक खापों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की राय के बाद पांच अहम एजेंडों पर सहमति बनी। इनमें गांव, गोत्र और गुहांड में विवाह को वैधता न देने, हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव, लिव-इन रिलेशनशिप पर रोक और समलैंगिकता को लेकर सवाल उठाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला व सभा के प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद, देशवाल खाप के प्रधान संजय देशवाल और लॉ प्रोफेसर डॉ. जोगेंद्र मोर ने कहा कि अधिवेशन में सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक विषयों पर व्यापक मंथन किया गया। अंतिम दिन अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, किसान नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव दिए। विशेष सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र ढुल, प्रोफेसर राजेश मलिक, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. डीपी वत्स, एएजी अमित सांगवान और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत सहित कई वक्ताओं ने सामाजिक चुनौतियों पर विचार रखे।
ये रहे अधिवेशन में पास 5 बड़े प्रस्ताव
पहला प्रस्ताव हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव से जुड़ा रहा, जिसमें गांव, गोत्र और गुहांड में होने वाली शादियों को मान्यता नहीं दिए जाने की मांग रखी गई। दूसरा प्रस्ताव लिव-इन रिलेशनशिप को वैध न मानने और इसे मिलने वाले सरकारी संरक्षण व सुविधाओं को बंद करने को लेकर रहा। तीसरे प्रस्ताव में युवाओं के नैतिक पतन और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए स्कूलों व कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया गया।
चौथे प्रस्ताव में किसी भी धर्म या जाति के खिलाफ
अमर्यादित भाषा के प्रयोग की सर्वसमाज की ओर से निंदा करने की बात कही गई। वहीं पांचवां प्रस्ताव किसानों को नई तकनीक और जानकारी देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, किसानों और खापों के संयुक्त सहयोग से किसान मेले व प्रदर्शनियां आयोजित करने को लेकर रहा।
21 सदस्यीय कमेटी करेगी फैसलों को जमीन पर लागू करने की तैयारी
अधिवेशन में यह भी फैसला लिया गया कि अगले 15 दिनों में 21 सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। इसमें प्रदेश के सभी जिलों, खापों और संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी गांव-गांव, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचकर पारित प्रस्तावों को लेकर संवाद करेगी और इन्हें लागू करने के लिए माहौल तैयार करेगी।
युवाओं के नैतिक उत्थान और नशामुक्ति पर विशेष जोर
चिंतन शिविर में युवाओं के नैतिक उत्थान और नशामुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी सहमति बनी। खाप पंचायतों को अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने और जिला स्तर पर निगरानी समितियों में प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई, ताकि नशे के खिलाफ सरकारी प्रयासों की निगरानी प्रभावी तरीके से हो सके।
