Haryana Bank Scam : चंडीगढ़। हरियाणा के 657 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब एक और वरिष्ठ IAS अधिकारी की भूमिका की जांच की जा रही है।

आरोप है कि संबंधित अधिकारी के कार्यकाल के दौरान पंचायत एवं विकास विभाग का खाता चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक में खुलवाया गया था। इसी वजह से उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, घोटाले के समय संबंधित अधिकारी मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव के साथ-साथ विकास एवं पंचायत विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। हालांकि, अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और अधिकारियों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

आठ IAS अधिकारियों तक पहुंची जांच

CBI की जांच अब तक करीब आठ IAS अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। इनमें कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की है।

सरकारी खातों से 657 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप

जांच के अनुसार, IDFC फर्स्ट बैंक के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से हरियाणा सरकार के कई विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के कुछ खातों से करीब 657 करोड़ रुपये की राशि की हेराफेरी की गई। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए ट्रांसफर की गई रकम

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर फर्जी FDR, RTGS-NEFT आवेदन, डेबिट नोट, बैंक पत्र और स्टेटमेंट तैयार कर सरकारी खातों से रकम निकाली गई। इसके बाद यह पैसा कई शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियां अब उन कारोबारी नेटवर्क, ज्वेलर्स, रियल एस्टेट से जुड़े लोगों और बिचौलियों की भी जांच कर रही हैं, जहां कथित रूप से यह रकम पहुंची।

CBI इस मामले में आपराधिक पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि ED अवैध धन लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और अधिकारियों व अन्य लोगों पर कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

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