कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के बहुचर्चित ₹590 करोड़ के IDFC बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की जांच अब बड़े प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में पांच IAS अधिकारियों से पूछताछ के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत हरियाणा सरकार से अनुमति मांगी है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की नौकरशाही और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, CBI की ओर से भेजी गई अनुमति संबंधी फाइल मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के पास पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि हरियाणा सरकार अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार तक इस पर फैसला ले सकती है। यदि सरकार अनुमति देती है तो यह हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा और संवेदनशील कदम माना जाएगा।
जांच अब बड़े अफसरों तक पहुंची
अब तक इस मामले में कार्रवाई मुख्य रूप से वित्तीय अधिकारियों, विभागीय कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों तक सीमित थी, लेकिन अब वरिष्ठ IAS अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी ने पूरे घोटाले को नई दिशा दे दी है। प्रशासनिक हलकों में इसे बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संकेत मिल रहे हैं कि जांच एजेंसी अब फैसले लेने वाली उच्च स्तर की प्रशासनिक भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
सूत्रों का कहना है कि सरकार के लिए CBI को अनुमति देने से पीछे हटना आसान नहीं होगा, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंप चुकी है। ऐसे में यदि जांच एजेंसी ने दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की जरूरत बताई है तो सरकार पर अनुमति देने का दबाव स्वाभाविक माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष पहले से इस घोटाले को लेकर सरकार पर हमलावर रहा है और अब यदि अनुमति देने में देरी होती है तो सरकार पर जांच प्रभावित करने के आरोप लग सकते हैं।
क्या है धारा 17-A?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत किसी भी लोक सेवक के खिलाफ उसके आधिकारिक निर्णयों से जुड़े मामलों में जांच या पूछताछ से पहले संबंधित सरकार की अनुमति लेना जरूरी होता है। यही वजह है कि CBI ने औपचारिक प्रक्रिया के तहत हरियाणा सरकार से अनुमति मांगी है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में न्यायिक व्याख्याओं और नियमों में बदलाव के बाद वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले की तुलना में अधिक आसान हुई है। यदि सरकार अनुमति देती है तो इसे हरियाणा की नौकरशाही के लिए बड़ा संदेश माना जाएगा।
पूछताछ में सामने आए कई नाम
CBI सूत्रों के मुताबिक, अब तक गिरफ्तार आरोपियों और पूछताछ में शामिल व्यक्तियों के बयानों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसी को कुछ ऐसे दस्तावेज और फाइल मूवमेंट भी मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर नियमों से हटकर फैसले लेने, आपत्तियों को नजरअंदाज करने और वित्तीय मंजूरियों में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
अब सभी की नजर हरियाणा सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि यह निर्णय न केवल जांच की दिशा तय करेगा बल्कि राज्य की नौकरशाही और राजनीतिक माहौल पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

