हरियाणा BJP ने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की तस्वीर वाला एक पोस्टर जारी कर पंजाब सरकार पर दिल्ली से संचालित होने का आरोप लगाया है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर “रिमोट कंट्रोल” बनाम “स्वतंत्र नेतृत्व” की बहस तेज होती दिख रही है। इस बार चर्चा की वजह बना हरियाणा BJP का X पोस्ट, जिसमें अरविंद केजरीवाल और पंजाब CM भगवंत मान की तस्वीर के साथ लिखा गया— “कुर्सी पंजाब में, कंट्रोल रूम कहीं और!”। पोस्टर में यह संदेश देने की कोशिश दिखी कि पंजाब सरकार के फैसलों का नियंत्रण चंडीगढ़ नहीं, बल्कि दिल्ली से हो रहा है।

राजनीतिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या BJP जानबूझकर भगवंत मान की राजनीतिक छवि को “कमजोर मुख्यमंत्री” के तौर पर स्थापित करना चाहती है? क्योंकि पोस्टर का पूरा नैरेटिव सीधे इस धारणा को मजबूत करता दिखता है कि पंजाब में असली शक्ति भगवंत मान नहीं, बल्कि अरविंद केजरीवाल हैं। BJP लंबे समय से AAP पर “हाईकमान कल्चर” और “दिल्ली से कंट्रोल” के आरोप लगाती रही है, लेकिन हरियाणा यूनिट की तरफ से इस तरह का विजुअल अटैक कई नए राजनीतिक संकेत भी दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा से यह हमला सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। पंजाब और हरियाणा की राजनीति इन दिनों SYL, पानी, किसान और सीमा से जुड़े मुद्दों पर लगातार आमने-सामने रही है। ऐसे में BJP संभवतः पंजाब की क्षेत्रीय अस्मिता को छूने की कोशिश कर रही है— यानी यह संदेश कि “पंजाब का फैसला पंजाब से होना चाहिए, दिल्ली से नहीं।”

दिलचस्प बात यह भी है कि BJP का यह हमला सीधे भगवंत मान पर व्यक्तिगत तरीके से नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक स्वायत्तता पर केंद्रित नजर आता है। इससे यह नैरेटिव बनाने की कोशिश दिखती है कि मान सरकार के बड़े फैसलों में केजरीवाल की भूमिका ज्यादा प्रभावी है। विपक्ष पहले भी आरोप लगाता रहा है कि पंजाब कैबिनेट और प्रशासनिक फैसलों में दिल्ली नेतृत्व की दखल रहती है, हालांकि AAP हमेशा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती आई है।

राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो BJP की यह रणनीति दो तरफा असर डालने की कोशिश मानी जा रही है। पहला, पंजाब में भगवंत मान की “स्वतंत्र नेता” वाली छवि को चुनौती देना। दूसरा, हरियाणा और उत्तर भारत के वोटरों के बीच यह संदेश देना कि AAP की राज्य सरकारें वास्तव में “केंद्रीय नेतृत्व संचालित मॉडल” पर चलती हैं।

उधर AAP समर्थकों का तर्क है कि अरविंद केजरीवाल पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं, इसलिए उनका मार्गदर्शन स्वाभाविक है। पार्टी इसे संगठनात्मक समन्वय बताती है, जबकि विपक्ष इसे “रिमोट कंट्रोल राजनीति” कहकर हमला करता है। यही वजह है कि यह बहस अब सिर्फ एक पोस्टर तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि “पंजाब में असली राजनीतिक शक्ति किसके पास है?” जैसे बड़े सवाल तक पहुंच गई है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्म हो सकता है, क्योंकि पंजाब की राजनीति में “पंजाबी बनाम बाहरी नियंत्रण” का नैरेटिव हमेशा संवेदनशील रहा है। ऐसे में BJP का यह पोस्ट सिर्फ सोशल मीडिया वार नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।