हरियाणा सरकार ने बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसके अंतर्गत अब किसी भी आवासीय भवन में एक मंजिल पर केवल एक स्वतंत्र फ्लैट या यूनिट बनाने की अनुमति दी जाएगी।

चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी इलाकों में रिहायशी मकान बनाने की सोच रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने सेक्टरों और कॉलोनियों में बनने वाली बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए बिल्डिंग कोड नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से तैयार किए गए नए मसौदे के मुताबिक, अब प्रदेश के शहरों में किसी भी इमारत की एक मंजिल पर केवल एक ही स्वतंत्र फ्लैट या आवासीय यूनिट का निर्माण किया जा सकेगा।

सरकार ने एक फ्लोर को विभाजित करके दो या तीन अलग-अलग आवास बनाने की मौजूदा व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। नई नीति के तहत एक प्लॉट पर अधिकतम चार मंजिलों तक ही निर्माण की इजाजत होगी और प्रत्येक मंजिल पर सिर्फ एक ही परिवार के रहने की जगह स्वीकृत की जाएगी।

    सुरक्षा मानकों को देखते हुए लिया गया फैसला

    शहरी विकास नियमों में इस सख्त संशोधन की मुख्य वजह हाल के दिनों में विभिन्न रिहायशी इलाकों में हुई आगजनी की घटनाएं हैं। बहुमंजिला रिहायशी भवनों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित प्रशासन ने इस विसंगति को दूर करने के लिए नया बिल्डिंग कोड तैयार किया है। असल में, एक ही मंजिल पर कई स्वतंत्र फ्लैट बना दिए जाने से उस इमारत में रहने वाले लोगों की कुल संख्या तय क्षमता से काफी अधिक हो जाती है।

    किसी भी भूखंड पर निर्माण की अनुमति उसके आकार, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और तय विकास मानकों के आधार पर ही दी जाती है। नक्शा स्वीकृत करते समय सीढ़ियां, पार्किंग, पानी, बिजली और आपातकालीन निकासी के रास्ते इसी स्वीकृत क्षमता के अनुसार निर्धारित होते हैं। अधिक आबादी होने से संकट के समय राहत और बचाव कार्य चलाने में भारी परेशानी आती है।

    इन शहरों में लागू होगी व्यवस्था, 25 जुलाई तक मांगे सुझाव

    यह नया नियम मुख्य रूप से गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, करनाल, हिसार, झज्जर, रोहतक और सोनीपत जैसे तेजी से विकसित हो रहे प्रमुख शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां वर्टिकल आवासों का निर्माण बहुत तेजी से हो रहा है। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक अमित खत्री द्वारा जारी इस आधिकारिक ड्राफ्ट को लेकर अब आम जनता और विशेषज्ञों से राय मांगी गई है।

    इस नए प्रावधान के संबंध में लोग आगामी 25 जुलाई तक अपने सुझाव और आपत्तियां विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद किसी भी भवन का निर्माण संबंधित क्षेत्र के जोनिंग प्लान और आर्किटेक्चरल कंट्रोल शीट के सख्त नियमों के तहत ही करना होगा। नियमों की अनदेखी कर एक फ्लोर को दो या अधिक हिस्सों में बांटने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।