पटना। बिहार में शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE-4) के विज्ञापन में लगातार हो रही देरी ने अभ्यर्थियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। इसी कड़ी में छात्र नेता दिलीप कुमार ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जुलाई 2026 के भीतर TRE-4 का विज्ञापन जारी नहीं होता है, तो शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को अपने पद से नैतिक इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका आरोप है कि पिछले दो वर्षों से विभाग की ओर से सिर्फ तारीखें बदली जा रही हैं, जिससे सूबे के 15 लाख से अधिक बेरोजगार युवा मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।
बदलते बयानों और तारीखों से उलझन में युवा
छात्र नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले अधिकारियों और मंत्रियों द्वारा यह दावा किया गया था कि जुलाई के शुरुआती दिनों में ही विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद बयान बदलकर जुलाई के अंतिम सप्ताह की बात कही गई और अंत में यह कहकर टाल दिया गया कि 25 जुलाई तक केवल BPSC को अधियाचना भेजी जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि जब सरकार अपने ही वादों पर खरी नहीं उतर पा रही है, तो जनता और युवाओं को गुमराह करने का कोई अधिकार नहीं है।
46 हजार पदों पर भर्ती का वादा और समयसीमा की मांग
दिलीप कुमार ने सरकार को याद दिलाया कि पूर्व में लगभग 46 हजार पदों पर शिक्षक बहाली करने का ऐलान किया गया था। अभ्यर्थियों की मांग है कि विज्ञापित पदों की संख्या में किसी भी प्रकार की कटौती न की जाए और सभी स्वीकृत पदों पर पारदर्शी तरीके से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। युवा महीनों से दिन-रात एक करके तैयारी में जुटे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट रोडमैप या निश्चित तिथि नहीं मिलने से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
समीक्षा बैठक और 25 जुलाई की डेडलाइन
गौरतलब है कि गत 7 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई थी। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिया गया था कि 25 जुलाई तक हर हाल में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को रिक्तियों की अधियाचना भेज दी जाए। इस डेडलाइन के गुजरने के बाद भी विज्ञापन की आधिकारिक तिथि घोषित न होने से अभ्यर्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
चेतावनी: मांगें पूरी न हुईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन
अंत में छात्र नेता ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जुलाई बीतने से पहले TRE-4 का विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया जाता है, तो राज्यभर के छात्र सड़क पर उतरकर जोरदार लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे। मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के आश्वासनों पर भरोसा करने वाले छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।


