हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पुलिसिंग का एक ऐसा घिनौना और शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जिसने खाकी के इकबाल की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। Lalluram.com पर खबर छपने के बाद जिस हीरा नगर पुलिस ने आनन-फानन में सरेआम गुंडागर्दी करने वाले बदमाशों को दबोचने का ढोंग रचा था, अब उसी पुलिस का एक ऐसा ‘बड़ा खेल’ बेनकाब हुआ है कि पूरी इंदौर पुलिस बैकफुट पर आ गई है। दहशत फैलाने वाले जिन बदमाशों को पुलिस कथित तौर पर ‘लंगड़ा’ करके जेल भेजने का वाहवाही लूट रही थी, उनके फर्जी प्लास्टर जेल के दरवाजे पर पहुंचते ही उतर गए! सोशल मीडिया पर वायरल एक धमाकेदार वीडियो ने पुलिसिया स्क्रिप्ट की पूरी पोल खोलकर रख दी है।

Lalluram.com की खबर का असर: पहले तोड़ी गुंडों की अकड़, फिर रची फर्जी लंगड़ाने की पटकथा!

पूरा मामला हीरा नगर थाना क्षेत्र का है। महज चार दिन पहले थाने में शांति से रहने का बाउंड भरकर निकले बेखौफ बदमाश शोभित साख्यवार, निक्की अहिरवार, ओम जाटव उर्फ देवांश और मयंक यादव ने एमआर-10 पर एक युवक को घेरकर बेरहमी से पीटा था। कार के कांच तोड़े और मेडिकल स्टोर से कैंची उठाकर जानलेवा हमला करने की कोशिश की थी। जब Lalluram.com ने इस खबर को प्रमुखता से उठाया और पूछा कि ‘बाउंड भरने के चार दिन बाद ही गुंडागर्दी कैसे?’ तो पुलिस में हड़कंप मच गया। खुद की साख बचाने के लिए हीरा नगर पुलिस ने आनन-फानन में आरोपियों को गिरफ्तार किया। लेकिन असली ‘सुपरहिट ड्रामा’ इसके बाद शुरू हुआ!

20,000 में फर्जी प्लास्टर का ‘डील’! वीडियो बनाने वाले का सनसनीखेज दावा

पुलिस आरोपियों को जब मीडिया के सामने लाई, तो उनके हाथ-पैरों पर भारी-भरकम प्लास्टर चढ़ा हुआ था। संदेश यह देने की कोशिश की गई कि ‘इंदौर पुलिस अपराधियों का इलाज करना जानती है।’ लेकिन यह सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक सस्ता ड्रामा था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो में दावा किया गया है कि बदमाशों के हाथ-पैर टूटे ही नहीं थे। वीडियो बनाने वाले शख्स ने सीधा दावा किया है कि 20 हजार रुपये के लेन-देन में फर्जी पट्टे (प्लास्टर) चढ़ाने का खेल रचा गया। 

जेल में खुला राज

जैसे ही पुलिस की गाड़ी इन ‘लंगड़ाते’ बदमाशों को लेकर जेल की सलाखों तक पहुंची, तो जेल प्रशासन की चेकिंग के दौरान सारे फर्जी पट्टे और प्लास्टर एक झटके में उतार दिए गए! जो आरोपी थाने से निकलते वक्त कदम नहीं बढ़ा पा रहे थे, वे जेल के अंदर अपने पैरों पर दौड़ते नजर आए।

बाउंड ओवर का तमाशा और हीरा नगर पुलिस का ‘बड़ा खेल’

यह घटना साबित करती है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ शून्य हो चुका है। हो भी क्यों न, जब पुलिस खुद चंद पैसों और पब्लिसिटी के लिए आरोपियों के साथ मिलकर ‘फर्जी मेडिकल रिपोर्ट’ और ‘फर्जी प्लास्टर’ का खेल खेलने लगे। 

उठे गंभीर सवाल

किसके इशारे पर चढ़े फर्जी पट्टे? क्या हीरा नगर पुलिस के आला अधिकारियों को नहीं पता था कि आरोपियों के हाथ-पैर सही-सलामत हैं? 20,000 की डील का जिम्मेदार कौन? क्या खाकी अब अपराधियों को जेल भेजने के बजाय उनके लिए ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ और ड्रामा तैयार करने की दुकान बन चुकी है?डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठते हैं कि किस अस्पताल या मेडिकल ऑफिसर ने बिना हड्डी टूटे आरोपियों के शरीर पर प्लास्टर चढ़ाने का फर्जी पर्चा जारी किया?

न्याय की धज्जियां, खाकी पर गहराता दाग 

पीड़ित नरेंद्र चौहान आज भी उस दहशत के साए में हैं, लेकिन जिस पुलिस से उन्हें न्याय की उम्मीद थी, वह पुलिस आरोपियों के साथ मिलकर ‘थिएटर’ चला रही थी। Lalluram.com की खबर के बाद पुलिस बैकफुट पर तो आई, लेकिन अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए उसने कानून की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के सामने आने के बाद इंदौर पुलिस कमिश्नर हीरा नगर थाने के इस ‘स्क्रिप्ट राइटर’ और ‘डायरेक्टर’ पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई करते हैं? या फिर इस फर्जीवाड़े को भी किसी कागजी जांच की बलि चढ़ा दिया जाएगा?

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