कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा की प्रशासनिक कार्यशैली में बड़ा बदलाव तब देखने को मिला, जब पहली बार राज्य कैबिनेट की बैठक राजधानी चंडीगढ़ से बाहर आयोजित की गई। गुरुग्राम में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में पूरा मंत्रिमंडल मौजूद रहा। यह कदम सरकार के विकेंद्रीकरण (Decentralization – अधिकारों का बंटवारा) और जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कई अहम फैसलों की जानकारी दी, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों और विधानसभा से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया जाएगा, जिसमें हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 पेश किया जाएगा। यह बिल कर्मचारियों के प्रमोशन और भर्ती ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है।

सीएम ने बताया कि कैबिनेट ने कॉमन कैडर (Common Cadre – समान कैडर) के ग्रुप डी कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है। अब 5 साल की सेवा पूरी कर चुके ग्रुप डी कर्मचारी क्लर्क पद के लिए पात्र होंगे, जिससे हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

ड्राफ्ट बिल में एक और बड़ा बदलाव करते हुए ग्रुप डी से क्लर्क पद पर प्रमोशन कोटा 20% से बढ़ाकर 30% करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही 5% एक्स-ग्रेशिया (Ex-Gratia – विशेष अनुग्रह) पदों को अनिवार्य करने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जो कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करेगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक नजरिए से यह बैठक और इसके बाद घोषित फैसले बेहद अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ सरकार ने राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक कर नई कार्यशैली का संकेत दिया, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों से जुड़े बड़े फैसले लेकर सीधा संदेश दिया है कि सरकार ग्राउंड लेवल (Ground Level – जमीनी स्तर) पर बदलाव लाने के मूड में है।

अगर ये फैसले लागू होते हैं, तो हरियाणा में न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि कर्मचारियों के करियर ग्रोथ (Career Growth – करियर विकास) के नए रास्ते भी खुलेंगे।