हरियाणा सरकार ने CLU प्रक्रिया को सरल बनाकर मात्र 3 दस्तावेज अनिवार्य कर दिए हैं। प्रदेश के 70 प्रतिशत क्षेत्र में अब CLU की आवश्यकता नहीं होगी।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने निवेशकों, उद्योगों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत अब भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति के लिए पहले की तरह 19 दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि केवल 3 दस्तावेजों के आधार पर आवेदन किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी, लालफीताशाही कम होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक सहित संबंधित विभागों को रेगुलेटरी रिफॉर्म तेजी से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में अब CLU अनुमति की आवश्यकता नहीं रहेगी। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

सरकार सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ MSME (Micro, Small and Medium Enterprises — सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भूमि उपयोग नियमों में भी लचीलापन ला रही है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ऑटो-CLU व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। वहीं कम जोखिम वाली इमारतों के लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट अब स्व-प्रमाणीकरण के आधार पर जारी किए जाएंगे, जबकि केवल उच्च जोखिम वाली इमारतों में थर्ड पार्टी सत्यापन की व्यवस्था लागू रहेगी।

इसके अलावा, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों को राहत देते हुए ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ की समय-सीमा 30 कार्य दिवस से घटाकर 21 कार्य दिवस कर दी है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का मानना है कि CLU प्रक्रिया के सरलीकरण से निवेशकों की लागत और समय दोनों की बचत की बचत होगी।