मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सचिवालय में समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने और जलाशयों को भरकर रखने के कड़े निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि भाखड़ा बांध में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, जिससे आगामी गर्मी में संकट नहीं होगा।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में बढ़ती गर्मी और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। सचिवालय में जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के हर हिस्से में पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण, पानी की किल्लत नहीं होनी चाहिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गर्मी के मौसम में जलाशयों और जलघरों के प्रबंधन को लेकर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों की जवाबदेही तय की।

जलस्तर की स्थिति और ग्रामीण जलापूर्ति का खाका

समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को राहत भरी जानकारी देते हुए बताया कि भाखड़ा बांध में इस वर्ष जल भंडारण की स्थिति पिछले वर्षों के मुकाबले काफी बेहतर है। वर्तमान में बांध का जलस्तर सामान्य से 36 फुट अधिक दर्ज किया गया है, और हरियाणा ने अभी तक अपने कोटे का केवल 75-76 प्रतिशत पानी ही इस्तेमाल किया है। प्रदेश की ग्रामीण जलापूर्ति प्रणाली पर चर्चा करते हुए बताया गया कि वर्तमान में 4000 एकल गांव आधारित और 2500 मल्टी-विलेज जलघर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहां ट्यूबवेल खराब हैं, उन्हें तुरंत ठीक किया जाए और जरूरत पड़ने पर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जाए, ताकि आम जनता को गर्मी में राहत मिल सके।

जल सुरक्षा और विकास कार्यों पर जोर

मुख्यमंत्री सैनी ने न केवल वर्तमान संकट बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने हिमाचल और उत्तर प्रदेश के साथ जुड़े किशाऊ प्रोजेक्ट जैसी अंतरराज्यीय जल परियोजनाओं पर जल्द बैठक बुलाने और केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। पानी के साथ-साथ गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए मुख्यमंत्री ने स्ट्रीट लाइट, फिरनी निर्माण और मानसून से पहले बड़े स्तर पर पौधारोपण के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि सभी विकास कार्यों और सरकारी घोषणाओं की प्रगति की वे स्वयं निरंतर समीक्षा करेंगे और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।