कुरुक्षेत्र के किसान अश्विनी शर्मा ने बिना हाइब्रिड बीजों के, केवल ऑर्गेनिक तरीके से 3 किलो 300 ग्राम का विशाल खीरा उगाकर मिसाल कायम की है।

कुरुक्षेत्र। आज के दौर में जहां अधिक उत्पादन और बड़े आकार की फसलों के लिए किसान तेजी से हाइब्रिड बीजों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं हरियाणा के एक किसान ने देसी बीज और ऑर्गेनिक खेती के दम पर ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब गांव से निकलकर सोशल मीडिया और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच चुकी है। यह कहानी है कुरुक्षेत्र जिले के गांव अभिमन्युपुर के प्रगतिशील किसान अश्विनी शर्मा की, जिन्होंने अपने किचन गार्डन में ऐसा विशालकाय खीरा उगाया है, जिसे लोग अब ‘बाहुबली खीरा’ कहकर बुला रहे हैं।

यह खीरा अपने आकार और वजन की वजह से लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। किसान अश्विनी शर्मा द्वारा उगाए गए इस खीरे की लंबाई करीब 2 फीट 2 इंच, वजन 3 किलो 300 ग्राम और मोटाई लगभग 1 फीट 1 इंच बताई जा रही है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाले खीरे जहां कुछ सौ ग्राम के होते हैं, वहीं इस खीरे का आकार देखकर लोग हैरान रह जा रहे हैं। गांव में इसे देखने वालों की भीड़ लग रही है, जबकि सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।

सबसे खास बात यह है कि यह विशालकाय खीरा किसी महंगे हाइब्रिड बीज या रासायनिक तकनीक से नहीं, बल्कि पारंपरिक देसी बीज और ऑर्गेनिक खेती के जरिए तैयार हुआ है। अश्विनी शर्मा का कहना है कि आज के समय में किसान बड़े आकार और ज्यादा उत्पादन के लिए हाइब्रिड बीजों पर निर्भर हो गए हैं, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव और देसी तकनीक पर भरोसा किया। उनका दावा है कि इस खीरे को तैयार करने में बेहद कम पानी का इस्तेमाल किया गया, जो जल संरक्षण के लिहाज से भी एक मिसाल है।

अश्विनी शर्मा केवल इस ‘बाहुबली’ खीरे तक सीमित नहीं हैं। वे इससे पहले करीब 15 किलो वजनी शलजम उगाकर भी चर्चा में रह चुके हैं। खेती के प्रति उनका प्रयोगात्मक नजरिया ही उन्हें अन्य किसानों से अलग बनाता है। मौसम के अनुसार वे अपने खेत और किचन गार्डन में अलग-अलग सब्जियां उगाते हैं, ताकि परिवार को पूरी तरह शुद्ध और ऑर्गेनिक भोजन मिल सके। उनका मानना है कि रासायनिक खेती से हटकर यदि किसान पारंपरिक देसी बीजों और प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं, तो कम लागत में बेहतर और स्वस्थ उत्पादन हासिल किया जा सकता है।

खेती विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस तरह के प्रयोग किसानों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। एक तरफ जहां जल संकट और रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव चिंता का विषय बने हुए हैं, वहीं देसी बीज और कम पानी में इतनी बड़ी फसल तैयार होना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।

फिलहाल, कुरुक्षेत्र का यह ‘बाहुबली खीरा’ इलाके में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे देसी खेती का चमत्कार बता रहे हैं, तो कुछ इसे किसानों के लिए नई प्रेरणा मान रहे हैं। एक बात जरूर साफ है कि हरियाणा के इस किसान ने यह साबित कर दिया है कि खेती में मेहनत, प्रयोग और परंपरागत ज्ञान का मेल हो तो छोटे से किचन गार्डन में भी बड़ा कमाल किया जा सकता है।