दमकल कर्मियों की हड़ताल 26वें और भूख हड़ताल 9वें दिन में प्रवेश कर गई है। कर्मचारी फरीदाबाद अग्निकांड के शहीदों के लिए समान मुआवजे और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

अजय सैनी, भिवानी: हरियाणा में दमकल विभाग के कर्मचारियों का आंदोलन अब बेहद गंभीर और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी जायज मांगों और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले साथियों को ‘शहीद’ का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की हड़ताल रविवार को 26वें दिन में प्रवेश कर गई। वहीं, क्रमिक भूख हड़ताल का आज 9वां दिन रहा। सरकार की कथित हठधर्मिता और संवेदनहीनता से नाराज होकर सर्व कर्मचारी संघ के जिला पदाधिकारियों ने खुद मोर्चे की कमान संभाल ली है। रविवार को जिला प्रधान सुमेर सिंह आर्य, जिला सचिव धर्मवीर भाटी और राज्य सचिव अशोक पिलानिया सहित अन्य वरिष्ठ नेता स्वयं भूख हड़ताल पर बैठे।

शहादत के सम्मान में भेदभाव पर गहरा रोष

धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों पर तीखा प्रहार किया। वरिष्ठ उप प्रधान सूरजभान जटासरा ने फरीदाबाद अग्निकांड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आग बुझाते समय शहीद हुए पुलिसकर्मी को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और शहीद का दर्जा दिया गया, जो उचित है। लेकिन, उन्हीं के साथ शहादत देने वाले फायर कर्मचारी भवीचंद शर्मा और रणवीर सिंह के लिए केवल 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दमकल कर्मियों की जान की कोई कीमत नहीं है? यह दोहरा मापदंड विभाग के मनोबल को तोड़ने वाला और अन्यायपूर्ण है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी और व्यवस्था पर संकट

दमकल कर्मियों के इस संघर्ष को अब नगर पालिका कर्मचारी संघ, किसान और मजदूर संगठनों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। इस व्यापक एकजुटता के कारण शहरों की सफाई व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं चरमरा गई हैं, जिससे आम जनता के जान-माल के नुकसान का खतरा बढ़ता जा रहा है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुमेर सिंह आर्य ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही हठधर्मिता छोड़कर मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा। कर्मचारियों ने संकल्प लिया है कि जब तक शहीदों को न्याय और जीवितों को सुरक्षा नहीं मिलती, यह संघर्ष जारी रहेगा।

भविष्य की रणनीति

धरने के दौरान कामरेड ओमप्रकाश, अशोक गोयत और अजय श्योराण जैसे प्रमुख वक्ताओं ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एकजुट रहने का आह्वान किया। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में समान कार्य के लिए समान सम्मान, उचित जोखिम भत्ता और अग्निशमन सेवा को पुलिस के समान दर्जा देना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि वे कोई भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अपनी मेहनत और सुरक्षा का हक मांग रहे हैं। आगामी दिनों में यदि वार्ता सफल नहीं होती है, तो कर्मचारी संघ प्रदेश स्तर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बना रहा है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।