हरियाणा को 31 मार्च 2027 तक पूरी तरह कचरा मुक्त बनाने के लिए सरकार ने एनजीटी में हलफनामा दिया है। सूबे के 60 डंपसाइट्स का काम पूरा हो चुका है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।

चंडीगढ़। हरियाणा को आने वाले समय में पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए राज्य सरकार ने 31 मार्च 2027 तक प्रदेश को लीगेसी वेस्ट से पूरी तरह मुक्त करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक लक्ष्य तय किया है। प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार Haryana Garbage Free Target 2027 को हासिल करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है जिसके तहत राज्य के कुल 75 लीगेसी वेस्ट डंपसाइट्स में से 60 का वैज्ञानिक बायो-माइनिंग तकनीक के जरिए पूरी तरह सफल निस्तारण किया जा चुका है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवशेष बचे 15 कचरा डंपसाइट्स को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर वैज्ञानिक तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा जिससे स्थानीय लोगों को प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी।

एनजीटी में सरकार का बड़ा हलफनामा

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर की गई एक अहम जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के माध्यम से एक विस्तृत शपथपत्र पेश किया है। इस कानूनी दस्तावेज में पूरे प्रदेश के भीतर ठोस कचरा प्रबंधन की मौजूदा स्थिति, अब तक की गई कड़ी कार्रवाइयों और भविष्य की समयबद्ध कार्ययोजना का पूरा खाका खींचा गया है। राज्य सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि सूबे में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है और सार्वजनिक स्थानों, बरसाती नालों, प्राकृतिक जल स्रोतों या किसी भी खाली पड़े भूखंडों पर अवैध रूप से कचरा फेंकने वाले लापरवाह लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया जा रहा है।

नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना

कचरा प्रबंधन के सख्त नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने वाले तत्वों पर प्रशासन ने अब तक करीब 7.63 करोड़ रुपये का भारी पर्यावरण मुआवजा जुर्माना वसूला है। इसके साथ ही इस वर्ष जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच ही कुल 3,486 लोगों के चालान काटे गए हैं। हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल के मुताबिक कचरा प्रबंधन की इस पूरी व्यवस्था को धरातल पर ज्यादा प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए अब अलग-अलग निकायों की जगह जिला स्तर पर एक ही सिंगल ई-टेंडर मॉडल लागू करने की अनूठी योजना तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के सभी 87 शहरी निकायों के लिए वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण स्थलों को पूरी तरह चिन्हित किया जा चुका है।

कबाड़ बीनने वालों का होगा पंजीकरण

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे के सही प्रबंधन के लिए कुल 105 बड़ी निर्माण कंपनियों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (इपीआर) के कड़े दायरे में लाया गया है। सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि सूबे में अब तक 14,889 कबाड़ बीनने वालों की पहचान की जा चुकी है जिनमें से 5,356 लोगों का आधिकारिक पंजीकरण पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त 217 महिला स्वयं सहायता समूहों को भी सीधे इस अभियान से जोड़ा गया है और कुल 1,515 वार्ड समितियों का गठन किया गया है ताकि हर घर से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग कलेक्ट करने की मुहिम को जन आंदोलन बनाया जा सके।