कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी और सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिले आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सरकारी डिग्री कॉलेजों में कुल 7,986 स्वीकृत पदों में से केवल 3,354 पदों पर ही नियमित शिक्षक कार्यरत हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में 4,632 पद पूरी तरह से खाली पड़े हैं, जिससे उच्च शिक्षा की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
गेस्ट लेक्चरर के भरोसे चल रही हैं कक्षाएं
कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर बनाए रखने के लिए सरकार वर्तमान में 2,057 अतिथि (गेस्ट) और विस्तार (एक्सटेंशन) लेक्चरर के सहारे कक्षाएं चला रही है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024-25 के वास्तविक कार्यभार को देखें तो कॉलेजों को सुचारू रूप से चलाने के लिए 8,572 शिक्षकों की जरूरत है, जो कि स्वीकृत पदों से भी कहीं ज्यादा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा मामला
शिक्षकों की इस भारी किल्लत को लेकर सोनीपत के सामाजिक कार्यकर्ता अमन दहिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में मांग की गई है कि सरकार छह महीने के भीतर इन खाली पड़े पदों को स्थायी भर्ती के जरिए भरे। हाई कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 26 अक्टूबर तय की है।
विषयवार स्थिति: अंग्रेजी और भूगोल में सबसे बुरा हाल
अगर विषयों के हिसाब से देखा जाए, तो स्थिति और भी चिंताजनक है:
- अंग्रेजी: सबसे ज्यादा 792 पद खाली हैं।
- भूगोल: कुल 508 पद रिक्त पड़े हैं।
- वाणिज्य (Commerce): शिक्षकों के 486 पद खाली हैं।
- गणित: 409 पदों पर कोई शिक्षक नहीं है।
- रसायन विज्ञान (Chemistry): 409 पद खाली हैं।
- पर्यावरण विज्ञान: इस विषय के सभी 22 स्वीकृत पद खाली पड़े हैं।
नए कॉलेज तो खुले, पर शिक्षक गायब
याचिका में सोनीपत जिले के भैंसवाल कलां, गन्नौर, मोहाना, बड़ौदा और जखोली जैसे नए खुले कॉलेजों का भी जिक्र किया गया है। उदाहरण के लिए, भैंसवाल कलां कॉलेज में स्वीकृत 17 पदों के मुकाबले सिर्फ 3 शिक्षक ही तैनात हैं, जबकि वहां कला और इतिहास जैसे मुख्य विषयों का कोई शिक्षक ही नहीं है। कई कॉलेज तो अभी भी स्कूल के भवनों में चल रहे हैं।
सरकार से की गई बड़ी मांगें
हाई कोर्ट में दायर इस याचिका के माध्यम से सरकार के सामने मुख्य रूप से ये मांगें रखी गई हैं:
- सरकारी कॉलेजों के खाली पड़े 4,632 पदों को 6 महीने में भरा जाए।
- एडेड (सहायता प्राप्त) कॉलेजों के 1,394 रिक्त पदों और 56 प्राचार्यों के पदों को 3 महीने के भीतर मंजूरी दी जाए।
- जब तक मौजूदा कॉलेजों में कम से कम 75 फीसदी नियमित स्टाफ की भर्ती न हो जाए, तब तक कोई भी नया सरकारी या एडेड कॉलेज न खोला जाए।
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