हरियाणा में HKRN के माध्यम से लगे कच्चे कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने के लिए सरकार ने एक समन्वय शिकायत निवारण समिति का गठन किया है।

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अनुबंधित कर्मचारियों के मामलों का तुरंत निपटारा करने और अदालती मुकदमों को कम करने के लिए चंडीगढ़ में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा एक विशेष समन्वय शिकायत निवारण समिति का गठन किया गया है। यह नई व्यवस्था हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से काम कर रहे सभी कच्चे कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं की समीक्षा करेगी। सरकार के इस नीतिगत फैसले से कर्मचारियों को प्रशासनिक स्तर पर ही अपनी शिकायतों का समयबद्ध समाधान मिल सकेगा।

समिति की संरचना और मुख्य जिम्मेदारियां

इस नवनिर्मित समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के महाप्रबंधक को सौंपी गई है। इसके साथ ही मानव संसाधन विभाग के अधीक्षक, वित्त विभाग के संबंधित अधीक्षक, क्रिड के आईटी प्रमुख और हरियाणा नॉलेज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक या उनके अधिकृत प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह प्रशासनिक टीम मुख्य रूप से कर्मचारियों की रोजगार सुरक्षा, अनुबंधित नियुक्तियों, पात्रता विवादों और सेवा सत्यापन से जुड़े गंभीर मामलों की गहन समीक्षा करेगी।

समाधान की प्रक्रिया और समय सीमा

समिति के सुचारू संचालन के लिए सहायक जिला अटॉर्नी, दो कानूनी सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। शुरुआती चरण में इस समिति की बैठकें सप्ताह में कम से कम दो बार भौतिक या वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएंगी। सामान्य नियमों के तहत कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान मामला संज्ञान में आने के 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। हालांकि, किसी विशेष परिस्थिति या जटिल मामले में इस तय अवधि को अधिकतम 10 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा सकेगा।

अनिवार्य ऑनलाइन पोर्टल और कानूनी नियम

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी शिकायतें सबसे पहले एचकेआरएन के ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल पर ही दर्ज की जानी अनिवार्य हैं। पोर्टल के स्तर पर जो मामले अनसुलझे रह जाएंगे, केवल उन्हें ही आगे विचार के लिए इस समन्वय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि बोर्डों, निगमों और सरकारी विभागों में कार्यरत सभी अनुबंधित कर्मी पहले इस तंत्र का उपयोग करेंगे। इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को अपनाने के बाद ही किसी प्रकार का न्यायिक हस्तक्षेप मान्य होगा।