हरियाणा के गृह रक्षी विभाग (होमगार्ड) में रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर स्वयंसेवकों के दोबारा नामांकन कराने का एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। जांच में फर्जी प्रविष्टियों सहित कई महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज गायब पाए गए हैं, जिसकी जांच अब एसीबी कर रही है।
चंडीगढ़। प्रदेश के गृह रक्षी विभाग (होमगार्ड) में प्रशासनिक स्तर पर चल रहे होमगार्ड वेलफेयर एवं भर्ती घोटाले की गहन जांच के दौरान रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभागीय जांच में यह मुख्य रूप से उजागर हुआ है कि सरकारी रिकॉर्ड में सुनियोजित तरीके से हेराफेरी करके कुछ पुराने स्वयंसेवकों (होमगार्ड) का दोबारा अवैध नामांकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में विभाग के भीतर बड़े पैमाने पर हुई कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर सीधा संकेत किया गया है। हालांकि, इस संवेदनशील मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के आला अधिकारी जांच प्रभावित होने का हवाला देते हुए अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
लॉन्ग रोल रजिस्टर में फर्जीवाड़ा
आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य मुख्यालय ने अगस्त 2021 में 13 लोगों को दोबारा होमगार्ड के रूप में नामांकित करने की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इसके बाद जब विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड की बारीकी से स्क्रूटनी की गई, तो पाया गया कि इनमें से 11 लोगों के नाम फर्जी तरीके से लॉन्ग रोल रजिस्टर में दर्ज किए गए थे। जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सेंटर कमांडर स्तर पर मुख्य रिकॉर्ड में फ्लूड (सफेदा) लगाया गया और बाद में नई प्रविष्टियां कर सरकारी दस्तावेजों में भारी हेराफेरी की गई।
मुख्य सेवा रिकॉर्ड और दस्तावेज गायब
इस बड़े फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए विशेष जांच टीम ने 18 और 19 अक्तूबर 2021 को संबंधित कार्यालय पहुंचकर सभी दस्तावेजों की विस्तृत रूप से स्क्रूटनी की थी। इस दौरान पाया गया कि जिन 11 लोगों के फर्जी नाम रजिस्टर में दर्ज थे, उनके व्यक्तिगत नामांकन फॉर्म, मूल सेवा रिकॉर्ड, ड्यूटी कॉल-आउट रजिस्टर, भुगतान प्राप्ति रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक कानूनी दस्तावेज कार्यालय से पूरी तरह गायब थे। इतना ही नहीं, पूर्व में राज्य मुख्यालय को भेजी गई इन कर्मचारियों की सेवा अवधि संबंधी रिपोर्ट भी तकनीकी रूप से संदिग्ध पाई गई।
रविवार को दर्ज मिली भर्ती तारीख
जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित संदिग्ध रिकॉर्ड को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया था और राज्य मुख्यालय को इन 11 लोगों की पुनर्नियुक्ति मंजूरी को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मजबूत सिफारिश की थी। इसके अलावा, सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है। इस जांच रिपोर्ट में कई अन्य चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं, जिसमें कुछ होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती की तारीख रविवार के दिन दर्ज मिली है, जबकि कुछ की सेवा मुक्ति सरकारी अवकाश के दिन दर्शाई गई है।
वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी जांच
इस पूरे मामले में सतर्कता बरतते हुए एसीबी ने होमगार्ड विभाग के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। हालांकि, अब तक विभाग के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया है। मुख्य शिकायत के अनुसार, भर्ती में वित्तीय अनियमितताओं का यह पूरा मामला वर्ष 2010 से 2025 के बीच का बताया जा रहा है। ऐसे में अब यह बड़े सवाल उठ रहे हैं कि इस महाघोटाले में शामिल विभाग के उच्च अधिकारियों तक कानूनी जांच की आंच आखिर कब तक पहुंचेगी।

