कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार प्रदेश में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने जा रही है। सरकार की पहल के तहत प्रदेश के 40 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती की मास्टर ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि किसान रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपना सकें।

इस पहल के तहत कुरुक्षेत्र में 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष नेचुरल फार्मिंग क्लस्टर तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ मिट्टी, पानी और पर्यावरण के संरक्षण को बढ़ावा देना है।

मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य में होगा सुधार

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य बेहतर होने की उम्मीद है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के कम इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को खेती की ऐसी पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम संरक्षण हो।

पानी की बचत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

सरकार की इस पहल का एक प्रमुख लक्ष्य पानी की बचत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी है। प्राकृतिक खेती में स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे खेती की लागत को कम करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

सरकार का फोकस है कि किसानों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक खेती को खेतों तक पहुंचाया जाए और हरियाणा में टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) को मजबूत आधार दिया जाए।

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