हरियाणा सरकार ने पंचायत विभाग के कर्मचारी नरेश कुमार को ₹6.45 करोड़ के वित्तीय घोटाले में सेवा से बर्खास्त कर दिया है। आरोपी ने फर्जी कंपनी और खातों के जरिए सरकारी धन का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग किया था।

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने विकास एवं पंचायत विभाग में सामने आए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले पर कड़ा प्रहार करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस गबन के मुख्य आरोपी कर्मचारी नरेश कुमार को सरकारी सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी किए गए इस आदेश ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। नरेश कुमार पर आरोप है कि उसने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने में सेंध लगाई और करोड़ों रुपये की राशि को निजी लाभ के लिए ठिकाने लगाया। मामला उजागर होने के बाद 6 अप्रैल 2026 को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, और अब सरकार ने उसे सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

फर्जी कंपनी का मायाजाल और ₹6.45 करोड़ की हेराफेरी

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नरेश कुमार ने बैंक अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के साथ साठगांठ कर “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स” नाम की एक फर्जी कंपनी बनाई थी। इस फर्जी इकाई के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए, जिनमें सरकारी फंड को अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी ने लगभग 6.45 करोड़ रुपये की सरकारी राशि अपने और अपने परिजनों के निजी खातों में जमा करवाई। इतना ही नहीं, जनता के पैसे की इस लूट से नरेश कुमार ने लग्जरी गाड़ियां और महंगी संपत्तियां भी खरीदीं। विजिलेंस की शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने के बाद अब इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश करने के लिए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है।

संविधान की विशेष धारा के तहत सीधी बर्खास्तगी

इस मामले की गंभीरता और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए सरकार ने एक साहसिक कानूनी कदम उठाया है। सरकार ने माना कि साक्ष्यों की संवेदनशीलता और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना के चलते नियमित विभागीय जांच संभव नहीं थी। इसी कारण, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) का उपयोग करते हुए बिना किसी पारंपरिक विभागीय जांच के सीधे बर्खास्तगी का फैसला लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे भ्रष्टाचार मुक्त कदमों की आवश्यकता है। वर्तमान में सीबीआई इस घोटाले के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है।