चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस में वर्ष 2008 में हुई इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस बड़े फैसले से 2008 बैच के चयनित पुलिस इंस्पेक्टरों को 15 साल बाद एक बड़ी राहत मिली है।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने एकल पीठ (सिंगल बेंच) के पूर्व फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता अमित कुमार और संदीप द्वारा भर्ती में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए दायर की गई अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
घबराहट में हस्ताक्षर बदलना एक सामान्य प्रक्रिया: हाई कोर्ट
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ किया कि परीक्षा के दबाव और घबराहट में ओएमआर शीट (OMR Sheet) पर हस्ताक्षर बदलना या स्थायी स्याही के निशान होना जैसी बातें बहुत सामान्य हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल इन तकनीकी कारणों या छोटे-मोटे अंतर के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को अवैध ठहराकर रद्द नहीं किया जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने 22 जुलाई 2008 को पुलिस इंस्पेक्टर के 20 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए लिखित परीक्षा, शारीरिक टेस्ट और साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल 2010 में अंतिम परिणाम घोषित किया गया था। इस चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी और ओएमआर शीट पर हस्ताक्षरों में अंतर का हवाला देकर कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया है और चयनित उम्मीदवारों की भर्ती पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
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